उत्कृष्ट कृष्टि!
उत्कृष्ट कृष्टि Extreme & superior Krishti (gradual destruction of passions). सबसे अधिक अनुभाग सहित अंतिम उत्कृष्ट कृष्टि है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उत्कृष्ट कृष्टि Extreme & superior Krishti (gradual destruction of passions). सबसे अधिक अनुभाग सहित अंतिम उत्कृष्ट कृष्टि है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वाद्य – Svadya. Worth tasting, appetizing. आहार के 4 भेदो मे एक भेद। मुख का स्वाद बदलने के लिए खाने वाले लौग, इलायची आदि पदार्थ स्वाद्य कहलाते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सांसारिक दुःख – Saansaarika Duhkha. Worldly affictions or troubles. लौकिक विषयों से उत्पन्न दुःख अर्थात् भोगसाधनात्मक भोगो का वियोग होने से जो दुःख उत्पन्न होता है। संसारी जीवों का इन्द्रिय सुख वासना जनित होने के कारण होने के कारण दुःखमय ही है क्योंकि आपत्त्किाल मे भोग व रोग चित्त मे उद्वेग करने वाले है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहायक कारण – Sahaayaka Kaarana. A helping cause. एक कारण । जो स्वयं कार्यरूप परिणाम वह उपादान कारण है तथा उसमें सहयक होने वाले पर द्रव्य व गुण निमित्त सहायक कारण है। इसे बलाधान या उदासीन निमित्त भी कहते है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पौराणिक राजवंश – Pauranika Rajavansha. Ancient dynasties like lkshvaku, Ugra, Kuru etc. इक्ष्वाकु वंश, उग्र्वंश, सुर्यवंश, कुंरुवंश, नाथवंश इत्यादि समस्त पौराणिक वंश कहलाते हैं “
आवली An area unit, A time unit (one Avali is the blinking of an eye). क्षेत्र का एक प्रमाण काल का एक प्रमाण जघन्य युक्तासंख्यात समयों की एक आवली होती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रध्वंसाभाव- 4 अभावों के भेदों में एक भेद; आगामी पर्याय में वर्तमान पर्याय का अभाव प्रध्वंसाभव है। जैसे-दही का घी में आभाव। pradhvamsabhava – a type of lacking, absence of present into future.
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदेशघात- कर्मो का अपकर्शण या नश्ट होना। pradesaghata – destruction or karmas