आदेश प्रारूपणा (बंध-उदय-सत्व)!
आदेश प्रारूपणा (बंध-उदय-सत्व) An exposition of bondage, fruition & existence of karmas after investigation. कर्मों के बंध उदय-सत्व का मार्गणा द्वारा विशेष व्याख्यान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आदेश प्रारूपणा (बंध-उदय-सत्व) An exposition of bondage, fruition & existence of karmas after investigation. कर्मों के बंध उदय-सत्व का मार्गणा द्वारा विशेष व्याख्यान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राजवृत्ति – राजा का कार्य, पक्षपात हो कुल की मर्यादा, बुद्धि और अपनी रक्षा करते हुए न्याय पूर्वक प्रजा का पालन करना राजाओं की राजवृत्ति कहलाती है। Rajavrtti-Ruling duties of a king
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ममकार – Mamakara. My-ness , A feeling of mine with worldly objects. आत्मा से भिन्न पर पदार्थों में मेरेपन का भाव ममकार हैं “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सम्यक् दर्शन : == सम्मद्दंसणलंभो वरं खु तेलोक्कलंभादो। —भगवती आराधना : ७४२ सम्यक् दर्शन की प्राप्ति तीन लोक के ऐश्वर्य से भी श्रेष्ठ है। यथार्थतत्त्व श्रद्धा सम्यक्त्वम्। —जैन सिद्धान्त दीपिका : ५-३ जीवादि तत्त्वों की यथार्थश्रद्धा (सम्यक्—विचार) करना सम्यक् दर्शन है। दर्शनभ्रष्टा: भ्रष्टा:, दर्शनभ्रष्टस्य नास्ति निर्वाणम्। सिध्यन्ति चरितभ्रष्टा:,…
आह्वान Invocation. आमंत्रण बुलाना पूजन के पहले स्थापन में पूज्य की विनय के लिए आह्वान एक विधि है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाब्धिसम्पन्न ऋषि – सम्यग्दर्षन प्राप्ति का एक निमित लब्धिसम्पन्न ऋशियो का दर्षन। Labdhisampanna Rsi-Super saints, visiting of whom is a cause of right faith
इन्द्रविधिदान क्रिया An auspicious and sacred act (to handover the duties by Indra). 45 वीं गर्भान्वय क्रिया- इस क्रिया में इन्द्र पद को प्राप्त जीव नम्रीभूत देवों को अपने अपने पदों पर नियुक्त करता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योनिमती मनुष्यनी – भाव से स्त्री वेद एव द्रव्य से पुरूश या स्त्री या नपुंसक वेद से संयुक्त मनुश्य, मनुश्यनी योतिमती मनुश्यनी कहते है। Yonimati Manusyani-Those human beings who are female according to Bhav ved But who might be male, female or hermaphrodite according to Dravya ved
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रीपाल चरित – Shreepaala Charita. Name of many books written by different writers. सकलकीर्तिकृत संस्कृत छंदोंबद्ध (ई. 1406-1442), भट्टारक श्रुतसागर कृत संस्कृत गद्य रचना (ई. 1487-1499), कवि परिमल्ल (ई. 1594) कृत, ब्र. नेमिदत्त (ई. 1428), वादिचन्द्र (वि. 1637-1664) कृत हिन्दी गीत काव्य, पं. दौलतराम (ई. 1720-1772) कृत भाषा ग्रंथ “