ईहावरणीय कर्म!
ईहावरणीय कर्म An obscurring karma of keen desire or curiosity. जिज्ञासा एंव इच्छाओं को रोकने वाला कर्म जिसके तीव्र क्षयोपशम से पदानुसारी बुद्धि प्राप्त होती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
ईहावरणीय कर्म An obscurring karma of keen desire or curiosity. जिज्ञासा एंव इच्छाओं को रोकने वाला कर्म जिसके तीव्र क्षयोपशम से पदानुसारी बुद्धि प्राप्त होती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रताड़ना – Prataadanaa. Harrasment, Scolding, Chiding. पीड़ित करना, सताना “
आरोप Allegation, Accusation, Blame. दोष लगाना अध्यारोपण एक वस्तु के गुणों को दूसरी वस्तु में आरोपित करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुष्पप्रकिर्णक विमान – Puspaprakirnaka Vimana. A type of heavenly abodes (scattered). विमान का एक भेद; श्रेणीबध्द विमानों के अन्तराल में बिखरे हुए पुष्पों की भांति पंक्ति रहित इधर उधर बिखरे हुए देव विमान “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुरुषप्रभ – Purusaprabha. A type of Kimpurusha peripatetic deities. किंपुरुष व्यंतर देवों का एक भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुराणसार – Puranasara. A book written by Acharya Shrichandra. आचार्य श्रीचन्द्र (ई. १४९८-१५१८) द्वारा रचित ग्रंथ “
गणधर Chief disciple (Gandhar) of Teerthankar (Jaina lord). तीर्थंकर के प्रमुख शिष्य इनके अन्य नाम गणी, गणीश ,गणपति ,गणेश आदि भी हैं। ये समस्त श्रुत के पारगामी, सातों ऋद्धियों के धारक, मुनियों के स्वामी एवं चार ज्ञानधारी होते हैं। [[महावीर स्वामी के गणधर]] [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रचाला प्रचाला – Prachalaa Prachalaa. Deep drowsiness (Karmic nature causing deep drowsiness). दर्शनावरण कर्म का एक भेद; जिसके उदय से सोते हुए मुख से लार बहती है और अंगोपांग भी चलते है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विशेष उपयोग – Vishesha. Special consciousness. ज्ञानोपयोग या साकारोपयोग, जो सामान्य – विशेशात्म्क पदार्थो के आकार को ग्रहण करे अर्थात् ज्ञान पदार्थो को विशेष करके जानता है “