सप्तऋषि भगवान की आरती
सप्तऋषि भगवान की आरती तर्ज—मैं तो आरती......... मैं तो आरती उतारूं रे, सप्त ऋषीश्वर की। जय-जय-जय सप्तऋषि, जय जय जय।। टेक.।। पहले मुनिवर हैं सुरमन्यु, चारण ऋद्धीधर.....चारणऋद्धीधर। दूजे ऋषिवर हैं श्रीमन्यु, जन जन के हितकर....जन जन के। इनको नमस्कार करूं, इनका सत्कार करूं, इनको निहारूं रे, हो-प्यारा-प्यारा मुखड़ा निहारूं रे... ...