पंचेन्द्रियत्व!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचेन्द्रियत्व – Panchendriyatva. To be five-sensed. पांच इन्द्रियों का होना” सयोगी अयोगी केवली को देव्येन्द्रिय की अपेक्षा पंचेन्द्रियत्वहोता है भावेन्द्रियकी अपेक्षा नहीं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचेन्द्रियत्व – Panchendriyatva. To be five-sensed. पांच इन्द्रियों का होना” सयोगी अयोगी केवली को देव्येन्द्रिय की अपेक्षा पंचेन्द्रियत्वहोता है भावेन्द्रियकी अपेक्षा नहीं “
उत्कर्षण Up – traction or increase in period of karmas. कर्मो की स्थिति (अनुभाग) को बढाना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पौरुषेय – Paurusheya. Man-made, Human-efforted, Manly. मनुष्य कृत, मनुष्य का काम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाणी – Vaanii.: Vocal speech,Voice,Language. ध्वनि, बोलने की शक्ति “
एकत्वविक्रिया Transformation of oneself into wild animals etc. forms, this power is possessed by hellish beings. अपने शरीर को व्याघ्र, हिरण, हंस आदि रूप से बना लेना एकत्वविक्रिया है। यह विक्रिया नरक में नारकी जीवों के होती है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
उच्चारणाचार्य Name of an Acharya. एक आचार्य जिन्होंने कषाय पाहुड़ के चूर्णिसूत्रों के आधार पर उच्चारण वृत्ति नामक टीका लिखी।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचा लोभ विवेक – Vaachaa Lobh Vivek .: Discrimination related to greed (not to make false statement or to speak lie). विवेक का एक भेद, इस वस्तु या ग्राम आदि का मैं स्वामी हूँ ऐसे वचन उच्चारण न करना “
आवागमन Transmigration, Arrival and departure. भव-भव में भ्रमण करना आना-जाना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाङ्मय – Vaandmaya.: Combination of overall grammer,metre& figures of speech. व्याकरण शास्त्र ,छंद शास्त्र और अलंकार शास्त्र इन तीनो के समूह को वाङ्मय कहते हैं “भगवान ऋषभदेव ने अपनी पुत्रिओं –ब्राह्मी ,सुंदरी को इस का अध्ययन कराया था “