भविष्याभाव संबंध!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भविष्याभाव संबंध – Bhavisyabhava Sambamdha. A type of relation pertaining to future. संबंध के अनेक भेड़ों में एक भेद “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भविष्याभाव संबंध – Bhavisyabhava Sambamdha. A type of relation pertaining to future. संबंध के अनेक भेड़ों में एक भेद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निसृष्टार्थ – Nisrishtaartha. Best message conveyor. संदेशवाहक सर्वश्रेष्ठ दूत, कार्य में सफलता प्राप्त करना इसका उद्देश्य रहता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगसार – आचार्य यागेन्दु देव द्वारा रचित 108 दोहा प्रमाण अपभ्रंष अध्यात्मिक ग्रंथ। Yogasara-Name of the treatise
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वचन प्रयोग कर्म – Vachan Prayoga karma.: A type of Prayoga karma (Pertaining to speech). प्रयोग कर्म के 3 भेदों में एक – जो संसार अवस्था में स्थित जीवों के और सयोग केवलियों के होता हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भक्त – Bhakta. A devout, a devotee, a pious person, Some-thing divided or separated. धार्मिक, धर्म या धर्मगुरु के प्रति समर्पित व्यक्ति, गणित की भागाहार विधि में भाज्य राशी को भागहार द्वारा भक्त किया गया कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वक्रग्रीव – Vakragriiv: The other name of Acharya Kund-Kund, Name of another great Acharya also. आचार्य कुंदकुंद का अपर नाम, अंगांशधारियों की परम्परा में एक आचार्य (ई.श. 12) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रस परित्याग – बाहय तप के 6 भेदों में एक, दूध, दही, धी, तेल, गुड, षक्कर, नमक इन 6 रसो में से सभी रस या एक या दो रस का त्याग करना। Rasa Parityga- Giving up of Patricular 6 kinds of taste
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निशेधसाधक हेतु – Nishedhsaadhak Hetu. Reason pertaining to negation. वह हेतु जो किसी बात का अभाव सिद्ध करे “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रविशेण – वि सं 734 में पùपुराण के रचियता एक आचार्य। Ravisena- name of an Acharya who wrote Jain Ramayan called as ‘Padmapuarn’