चतुर्थज्ञान!
चतुर्थज्ञान Telepathy (Manahparyay Gyan); a type of knowledge. मनःपर्यय ज्ञान ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुर्थज्ञान Telepathy (Manahparyay Gyan); a type of knowledge. मनःपर्यय ज्ञान ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विवाह क्रिया – Vivaha Kriya. An auspicious activity- marriage according to tradition. गर्भान्वय की ५३ क्रियाओं में १७ वीं क्रिया; सिध्द पूजन व तीन अप्रिय की विधिपूर्वक पूजन करते हुए, अगिन प्रदक्षिणा देते हुए परिवार व समाज की साक्षी में सजाति कुलीन कन्या का पाणिग्रहण करना “
दुन्दुभीनाद An auspicious emblem of Lord (sound of kettle-drum). भगवान के आठ प्रातिहार्यों में एक प्रातिहार्य एंव पंचाश्रचर्यवृष्टि में से एक (नगाडे की आवाज)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दुर्दर An infraction of meditative relaxation, A mountain of Bharat Kshetra middle Arya Khand (region). कायोत्सर्ग एंव वंदना का एक अतिचार , भरतक्षेत्र मध्य आर्यखण्ड के मलयगिरि के निकट स्थित एक पर्वत। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव निक्षेप – Bhava Niksepa. Appropriate establishment of meaning for something. निक्षेप का एक भेद; वर्तमान पर्याय से युक्त द्रव्य ” जैसे- सेवा करने वाले को सेवक कहना “
उपशम सम्यक्त्त्व Subsidential right belief, Subsidential serenity .दर्शन मोहनीय कर्म के उपशम से आत्मा में जो निर्मल श्रद्धान उत्पन्न होता है उसे उपशम सम्यक्त्त्व कहते हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव अप्रतिक्रमण – Bhava Apratikramana. To have attachment with the past passionate volitions. अतीत काल में हुए रागादि भाव को वर्तमान में अच्छा जानना, उनका संस्कार एंव उनके प्रति ममत्व भाव रहना “
देवकूट Name of a summit of Chandragiri Vakshar in western Videh. अपर विदेह स्थित चन्द्रगिरि वक्षार का एक कूट।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वास्तुविधान – Vaastuvidhaana.: A special kind of worshipping to be observed specially on the completion of the construction of temple or home for its auspiciousness. मंदिर,मकान आदि की पूर्णता पर उसमें किया जाने वाला एक विशेष पूजा अनुष्ठान ,इसमें वास्तु-भवन के रक्षक देवताओं को आव्हान करके उन्हें संतुष्ट किया जाता है ताकि भवन में…