द्रविड़ संघ!
द्रविड़ संघ A group of Digambar Jain saints. दिगम्बर परम्परा के अन्तर्गत एक साधु संघ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्रविड़ संघ A group of Digambar Jain saints. दिगम्बर परम्परा के अन्तर्गत एक साधु संघ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुक्र – Shukra . Name of the 87th planet, the 9th heaven and the first Indrak (layer) of shukra heaven. 87वां ग्रह, 9वां स्वर्ग, शुक्र स्वर्ग का प्रथम इन्द्रक “
एकद्रव्य Unitariness in matters. धर्म, अधर्म और आकाश ये तीनों द्रव्य की अपेक्षा एक ही है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
दोष Faults. त्रुटि , कमी, रागद्वेष आदि 18 दोष; अरिहंट परमात्मा इनसे रहित होते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाचिक विनय – Vaachika Vinaya.: To pay reverence to saints by eulogical speech. उपचार विनय का एक भेद; उपशांत ,सावद्य क्रियारहित, अभिमान रहित वचन गुरुओं –साधुओं के सामने बोलना “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सत्पुरुष : == दट्ठूण अण्णदोसं, सप्पुरिसो लज्जिओ सयं होइ। —भगवती आराधना : ३७२ सत्पुरुष दूसरे के दोष देखकर स्वयं में लज्जा का अनुभव करता है। (वह कभी उन्हें अपने मुंह से नहीं कह पाता)।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मासैकवासिता – Masaikavasita. Monthly seasonal staying & moving of Jaina saints. स्थिति कल्प का ९ वां भेद; छहों ऋतुओं में से एकेक ऋतु में एक मांस तक एक स्थान में मुनि निवास करते हैं, और एक मास विहार करते हैं ” उसे मासैकवासिता कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचसमिति – Panchasamiti. Five kinds of saint conduct related to carefulness. ईर्या, भाषा, एषणा, आदाननिक्षेपण और प्रतिष्ठापन यें पांच समिति संयम शुद्धि में कारण कही गयीं हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वागर्थसंग्रह – Vaagarthasangraha.: Name of a treatise composed by the poet Parmeshthi containing the life sketch of 63 great personalities. कवि परमेष्ठी कृत एक संस्कृत ग्रन्थ ” इसमें 63 शलाका पुरुषों का वर्णन है “