द्रव्य स्वभाव!
द्रव्य स्वभाव Nature of matters. द्रव्य का स्वतत्व अर्थात् स्वस्वभाव । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्रव्य स्वभाव Nature of matters. द्रव्य का स्वतत्व अर्थात् स्वस्वभाव । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वेश्या –Vesya Prostitute, immoral woman. गणिका, बाजारू या व्यभिचारिणी स्त्री “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थिर भाव – Sthira Bhaava. Stable emotions or temperaments, stability of mental state.चित्त को निश्चल रखना अर्थात् आत्मस्थिरता या समता भाव, सामायिक।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावसूत्र – Bhavasutra. Ideal formula (of right faith,right knowledge & right conduct) for right path. सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान, सम्यक्चारित्र इन तीन गुणों से निर्मित्त उपासक का वैचारिक सूत्र “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुरजमध्य व्रत–Murajamadhya Vrat. A particular type of vow or fasting. क्रमशः 5,4,3,2,2,3,4,5 इस प्रकार के 28 उपवास करना बीच के सभी खली स्थानों में एक–एक करके 8 पारणाए करना”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थिति क्षय -Sthitiksaya. Destruction of Karmic statesकर्मों की स्थिति का धात होना।
द्रव्य वेद Something related to gender formation. निर्माण व अंगोंपांग नामकर्मों के उदय से शरीर में पुरूष – स्त्री व नपुंसक के चिन्ह बनना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चैत्यद्रुम A type of divinely trees having idols of Lord Arihant in Samavasaran. चैत्यवृक्ष , जो समवशरण एवं देवों के भवन के अकृत्रिम मंदिरों में होते हैं , इनके मूलभाग में जिनप्रतिमाएं विराजमान रहती हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थानांग – Sthaanaamga. A part of scriptural knowledge (Dvadshang shrut).द्वादषंग श्रुत स्कंध का तीसरा अंग। इसमे 42000 पदो मे जीव के 10 स्थानो का वर्णन है।
द्रव्य प्रमाण Numerical measure of substances. एक परमाणु से लेकर महास्कन्ध पर्यन्त, संख्यात, असंख्यात और अनन्त या पल, तुला, और कुडव आदि द्रव्य प्रमाण हैं।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]