संभवदल कर्म!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संभवदल कर्म – Sanbhavadala Karma. Cutting of wood. लकड़ी के आवश्यकतानुसार भाग कर दिये जाना संभवदल कर्म है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संभवदल कर्म – Sanbhavadala Karma. Cutting of wood. लकड़ी के आवश्यकतानुसार भाग कर दिये जाना संभवदल कर्म है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नसंचया – विदेह क्षएत्र की 32 नगरियो मे 16 नगरी Ratnasancaya- Name of the 16th city situated in Videh Kshetra (region)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वासोच्छ्वास – Shvaasocchvaasa. Breathing (exhaling & inhaling air). प्राणापान ” जो पवन भीतर से बाहर आती है वह उच्छ्वास या प्राण है व जो बाहर की वायु भीतर ली जाये वह श्वास या अपान है “
उत्सर्पिणी A large period of time, progressive half cycle, ascending cycle of time. जिस काल में जीवों की आयु बल ऊँचाई आदि का उत्तरोत्तर विकास होता है।इसके 6 भेद हैं।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युगपत – एक साथ जैसे केवल ज्ञान होने के बाद अनन्त ज्ञान व अनन्त दर्षन एक साथ ही होता है। Yugapata-Unitedly, Combinedly
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रेणी – Shrenee. Series, Class, Division. पंक्ति, क्रम, इस शब्द का प्रयोग अनेक प्रकरणों में आता है, जैसे आकाश प्रदेशो की श्रेणी, राजसेना की 18 श्रेणियाँ, स्वर्गो के श्रेणीबद्ध विमान, शुक्लध्यानगत साधू की उपशम व क्षपक श्रेणी आदि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नकंबल – रत्नों से बना एक कंबल। उज्जैन की सेठानी यषोभद्रा ने अपने पु़त्र सुकुमाल की पत्नियों के लिए रत्नकंबल खरीदा और पुत्र वधुओं के लिए उसकी जूतिया बनवायी। देंखें – सुकुमाल चरित्र Ratnakambala-Blanket of jewels
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतधर आम्नाय – Shrutadhara Aamnaaya. The tradition of great saints possesing scriptural knowledge (shrutgyan). श्रुत को धारण करने वाले आचार्यो की परम्परा, मूलसंघ की पट्टावली में अंतिम श्रुतकेवली भद्रबाहु हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगस्थान – योगषक्ति परिणमन के दर्जे इसके उपपाद एकांतानुवृद्धि परिणामयोग तीन भेद है। Yogasthana-The different grades of activities related to mind, speech & body