दीक्षाविधि!
दीक्षाविधि Procedure for granting Diksha (consecration or initiation). कृतिकर्म सिद्ध भक्ति, योगि भक्ति, लोंचकरण, नामकरण, नाग्न्य प्रदान,पच्छिका प्रदान, सिद्ध भक्ति आदि विधि। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दीक्षाविधि Procedure for granting Diksha (consecration or initiation). कृतिकर्म सिद्ध भक्ति, योगि भक्ति, लोंचकरण, नामकरण, नाग्न्य प्रदान,पच्छिका प्रदान, सिद्ध भक्ति आदि विधि। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक भंग- जहां अलग-अलग भाव हो वह प्रत्येक भंग है। pratyeka bhamga – each part, different feelings.
दिव्यतिलक A city in the north of Vijayardh mountain. विजयार्थ की उत्तर श्रेणी का एक नगर ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्येक पद- जो भ्ज्ञाव एक जीव के एक काल में यगपत संभव हो ऐसे भाव प्रत्येक पद कहलाते है। pratyeka pada – feelings simultaneously existing of one in a praticular time period
दामोदर (कवि) Name of a poet of the year 1230. ई.सन् 1230 के एक कवि जिन्होंने णमिणाह चरिउ की रचना की । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमदा- प्रमाद की बहुलवा से स्त्रियों को प्रमदा कहते हैं, समवषरण की नाट्यषाला। Pramada- Lustful women, Name of a stage of drama in Samavasharan- assembly of Lord
दशा Condition, circumstances. स्थिति परिस्थिति – जीवन आदि की अवस्था बाल्य, यौवन आदि ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रभावना- सम्यग्दर्षन ज्ञान चारित्र रुप रत्नत्रय के प्रभाव से आत्मा को प्रकाषमान करना। ज्ञान,ध्यान, तप, दया, दान, जिन पूजा आदि के द्वारा जिनधर्म की महिमा को प्रकाषित करना। Prabhavana – Glorification, Promotion (influencing pertaining to religion)
दर्शनावरण Perception covering Karma, Faith deluding Karma. 8 कर्मों में एक कर्म जिस कर्म के उदय से जीव के दर्शन गुण पर आवरण होता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहस्रनाम विधान – Sahasranaama Vidhanaa. A composition of worshipping hymn composed by Ganini Aryika Shri Gyanmati Mataji. श्री जिनसेनाचार्य द्वारा रचित सहस्रनाम स्तोत्र के आधर पर गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी द्वारा सन 1954 में रचे गये 1008 मंत्रों के अर्थ को छन्दों में निबद्ध करके रचित 1008 अध्र्यो वाला विधान ।