लोक अनुप्रेक्षा!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोक अनुप्रेक्षा – Lok Anuprekshaa.: One of the 12 reflections (continuous contemplation for pain & pleasure ). 12 भावनाओं में से एक भावना ;लोक की स्तिथि,विस्तार ,जीवों के सुख –दुख आदि का बराबर चिंतन करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोक अनुप्रेक्षा – Lok Anuprekshaa.: One of the 12 reflections (continuous contemplation for pain & pleasure ). 12 भावनाओं में से एक भावना ;लोक की स्तिथि,विस्तार ,जीवों के सुख –दुख आदि का बराबर चिंतन करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पायसागर (आचार्य) – Payasagara (Acarya). Name of a Digambar Jain Acharya, the disciple of Charitra Chakravarti Acharya Shri Shantisagar Maharaj. चरित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के प्रमुख ७ मुनि शिष्यों में से एक प्रभावक आचार्य “
उन्मग्नजला नदी Name of a river of Vijayardha mountain. विजयार्ध पर्वत की तमिस्र गुहा में बहने वाली नदी इसे उन्मग्न इसलिये कहते हैं कि यह अपने जल में पड़े हुए द्रव्य को डुबाती नहीं है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लीन- Leen.: Deeply engrossed or immersed (in). रत, स्थिर या तन्मय होना “
त्रिबार सामायिक Observing equanimity three times with meditation. पूर्वान्ह , मध्यान्ह , अपरान्ह, तीनों कालों में सामायिक करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
उत्तरायन Movements towards north side (of Sun etc.). संचार सूर्य का 6 महा (1 अयन) उत्तर दिशा की ओर संचार करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रह्मवाद – Brahmvada. Name of a doctrine (related to non-dualism). एक अव्दैतवाद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाद मुण्ड :Controlling of feet-activities by Jain Sainth (in samayik etc).जैन मुनियो के दस प्रकार के मुण्डन मे से एक, सामायिक इत्यादि के समय स्वच्छदापूर्वक पगो का संकोच व विस्तार न करना, पगो की क्रियाओ को वश मे रखना।
त्रिपृष्ठ One of the past birth of Lord Mahavir who was the first Narayan in the time of Lord Shreyansnath. भगवान महावीर के पूर्व भव में एक भव – श्रेयांसनाथ भगवान के समय में हुआ प्रथम नारायण, जो बाद में महावीर स्वामी हुए। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]