चतुर्दश पूर्वधर!
चतुर्दश पूर्वधर Acharyas possessing knowledge of 14 Purvas. १४ पूर्व के ज्ञाता ५ मुनि ; विष्णु , नंदिमित्र , अपराजित , गोवर्धन , भद्रबाहु ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चतुर्दश पूर्वधर Acharyas possessing knowledge of 14 Purvas. १४ पूर्व के ज्ञाता ५ मुनि ; विष्णु , नंदिमित्र , अपराजित , गोवर्धन , भद्रबाहु ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भोक्त्रत्व नय:A viewpoint believing that soul is the enjoyer of joy & sorrow. नय; जिसकी अपेक्षा से आत्मद्रव्य सुख-दुखादि का भोक्ताहै “
चतुर्थकाल The fourth division of Avasarpini Kal (regressive half cycle of time). अवसर्पिणी काल के ६ भेदों में दुषमा-सुषमा नामक चौथा भेद , जिसमें २४ तीर्थंकर जन्म लेते हैं ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिबिम्ब – Pratibimba. Image, Idol of Lord. परछाई, भगवान की प्रतिमा-मूर्ती “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्यासागर – Vidyashagara. Name of a great Digambar Jain Acharya of 20th century. चारित्रचक्रवर्ती आचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिवसागर महाराज के शिष्य मुनि श्री ज्ञानसागर महाराज (जो बाद में समाज द्वारा आचार्य बनाये गये) द्वारा दीक्षित बीसवीं सदी के एक प्रभावक आचार्य “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिपत्ति – Pratipatti. A type of scriptual knowledge (Shrutgyan), confirmed knowledge (inference). अर्थलिंगज श्रुतज्ञान का एक भेद, धारणा “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिक्षण परिमाण – Pratikshana Parimaana. Momentary modification. द्रव्यों में प्रतिसमय परिणमन होना “
देशकाल Something related to the place and time. क्षेत्र एवं अवसर या समय के अनुसार कुछ विशेष होना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]