प्रदेशघात!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदेशघात- कर्मो का अपकर्शण या नश्ट होना। pradesaghata – destruction or karmas
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रदेशघात- कर्मो का अपकर्शण या नश्ट होना। pradesaghata – destruction or karmas
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्ररुपणा- निरुपण; सत् संख्या, बंध, उदय आदि की अपेक्षा जीवों का विषेश कथन। Prarupana- Representation, Enunciation (related to living beings)
दुःखदायक Pain causing activities. दुःख देने वाली भावना, कार्य आदि जैसे हिंसादि पांच पाप इस लोक और परलोक में दुख देने वाले हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमोक्षमार्ग- अर्हत, सिद्ध अवस्था की प्राप्ति का मार्ग है। मोक्ष-अर्हत अवस्था और प्रमाक्ष-सिद्ध अवस्था है। Pramoksamarga- Path leading to the bodiless state of salvation (as lord Siddha)
दिव्य मनुष्य Some Jaina great personalities. देवपूजित शलाका पुरूष, कामदेव और विद्याधर ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमादाचारित्र- प्रमाद सहित आचरण, असावधानी का काम। Pramadacaritra- Conduct of negligence, work done with lust
इंद्रप्रस्थ Name of a city (present Delhi). प्रवास से लौटने पर युधिष्ठिर द्वारा बनाये गये नगर का नाम, यह कुरूक्षेत्र के पास है इसलिये वर्तमान देहली की इन्द्रप्रस्थ है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रमाण स्वार्थ- अनुमान प्रमाण के भेद; परोपदेष के बिना जो ज्ञान होता है, वह स्वार्थ प्रमाण है। PramanaSvartha- Knowledge gained by self
दशस्थिति कल्प Characteristics of 10 basic restraints of saints. व्यवहार चारित्रधारी साधु के 10 स्थितिकल्प अचेलकत्व, उद्दिष्ट भोजन त्याग, वसतिका बनवाने का त्याग, राजपिंड का त्याग, कृतिकर्म, पत्र को ही व्रत देना, विनय, प्रतिक्रमण, मासैकवासता, चातुर्मास करना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]