ब्रहत्कथासरितसागर!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रहत्कथासरितसागर – Brhatkathasaritasagara. A book written by Acharya Somdeva . आचार्य सोमदेव (ई. श. १९ मध्य ) द्वारा रचित एक कथाकोष “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्रहत्कथासरितसागर – Brhatkathasaritasagara. A book written by Acharya Somdeva . आचार्य सोमदेव (ई. श. १९ मध्य ) द्वारा रचित एक कथाकोष “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मिश्रनुकंपा–Mishranukanpa. A type of compassion. अनुकम्पा के तीन भेदो में एक भेद; अणुव्रती अर्थात् गृहस्थो पर जो दया की जाति है”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == विषय : == खेलम्मि पडिअमप्पं जह न तरइ मच्छिआवि मोएऊं। तह विसयखेलपडिअं न तरइ, अप्पंपि कामंधो।। —इन्द्रियपराजय शतक : ४६ जिस तरह श्लेष्म में पड़ी हुई मक्खी श्लेष्म से बाहर निकलने में असमर्थ होती है, वैसे ही विषयरूपी श्लेष्म में पड़ा हुआ व्यक्ति अपने आपको विषय से अलग…
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मृगावती– Mragavati. Mother’s name of 1st Narayan Triprashth. प्रथम नारायण ‘त्रिपृष्ठ’ की माता का नाम” वैशाली के राजा चेटक की 7 पुत्रियों में से एक भगवान् महावीर की मौसी”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचव्रत – Panchavrata. Five kinds of vows-non-violence, truth, non-stealing, celebacy, non-possession. अहिंसा, सत्य, अचौर्य,ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह यें पांच महाव्रत है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैक्रियिक षटक –VaikriyikaSarka A type of hexa pertaining to transformable body (of deities & hellish beings). वैक्रियिक शरीर व वैक्रियिक अंगोपांग, नरक गति व नरक गत्यानुपूर्वी, देवगति व देवगत्यानुपूर्वी “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विराग – Viraga. Aversion from the worldly attachments, Indif-ferent. विरक्त होने का नाम विराग है ” सांसारिक वासनाओं के प्रति उदासीनता, राग से मुक्ति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंचमकाल – Panchamkaala. Fifth regressive period of half universal cycle (Avasarpini kal). अवसर्पिणी का पंचम दुखमा काल, जिसमें तीर्थंकर आदि विशिष्ठ पुण्यात्माओं का जन्म नहीं होता “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाइम – Vaaima.: A type of knitted material (as clothes,filter articles etc.) द्रव्य निक्षेप का एक भेद “बुनने रूप क्रिया से सिद्ध हुए सूप ,चालनी ,कम्बल ,वस्त्र आदि द्रव्य “