पार्श्वपुराण!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पार्श्वपुराण – Parsvapurana. Name of books written by different Acharyas. पद्मकीर्ति (ई. ९४२), वादिराज (ई. १०२५) आदि कई आचार्यो द्वारा रचित इस नामक ग्रंथ हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पार्श्वपुराण – Parsvapurana. Name of books written by different Acharyas. पद्मकीर्ति (ई. ९४२), वादिराज (ई. १०२५) आदि कई आचार्यो द्वारा रचित इस नामक ग्रंथ हैं “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष]] == निर्लेप : == चरदि जदं जदि णिच्चं, कमलं व जले णिरुवलेवो। —प्रवचनसार : ३-१८ यदि साधक प्रत्येक कार्य यतना से करता है, तो वह जल में कमल की भाँति निर्लेप रहता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वरचंद्र – Varachandra: Name of the 6th predestined Balbhadra,Name of the son of Lord Chandraprabh in His worldly life. आगामी छठा बलभद्र ,तीर्थंकर चन्द्रप्रभ का एक पुत्र .इसे राज्य सौंपकर ही वह दीक्षित हुए थे “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] न्याय – Nyaaya. Verdict or jisticce. क़ानून, इंसाफ, सच्चाई, निर्णय या जिसके द्वारा निश्चय किया जाये ऐसी नितिक्रिया का करना न्याय कहा जाता है”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == द्रव्य : == आकाशकालजीवा:, धर्माधर्मौ च र्मूितपरिहीना:। मूर्तं पुद्गलद्रव्यं, जीव: खलु चेतनस्तेषु।। —समणसुत्त : ६२६ आकाश, काल, जीव, धर्म और अधर्म द्रव्य अर्मूितक हैं। पुद्गल द्रव्य र्मूितक है। इन सबमें केवल जीव द्रव्य ही चेतन है। दव्वं सल्लक्खणयं उप्पादव्वयधुवत्तसंजुत्तं। —पंचास्तिकाय : १० द्रव्य का लक्षण सत् है और वह सदा…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैक्रियिक शरीर अंगोपांग –VaikriyikaSariraAmgopaniga. A Karmic nature causing formation of the organs of transformable body of deities & hellish beings. नामकर्म का एक भेद, जिसके उदय से देव – नारकी के शरीर के अंग व उपअंग बनते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नौ – Nau. Nine, a number. नव-जैसे, नव अनुदिशा, नव ग्रैवेयक, नव नारायण, नव निधि इत्यादि “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यमकूट–Yamkut. Name of a summit at Yamkgiri. यमकगिरी पर स्थित एक कूट”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विभाषा – Vibhasha. Describing of something in different ways (like by presentation, exposition, description etc.). विविध प्रकार के भाषण अर्थात् कथन करने को विभाषा कहते हैं ” विभाषा, प्ररूपणा, निरूपण, व्याख्यान ये सब एकार्थवाची नाम हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भद्र प्रक्रति – Bhadra Prakrti. Gentle disposition. भला या सज्जन स्वभाव होना ” सरल स्वभावी “