चैत्यवंदना!
चैत्यवंदना Reverential visits of temples with self-involvement. आत्माधीन होजकर जिनबिम्ब आदिकों की वंदना करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चैत्यवंदना Reverential visits of temples with self-involvement. आत्माधीन होजकर जिनबिम्ब आदिकों की वंदना करना ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्त्यानगृद्वि कर्म प्रकृति – Styangraddhi Karma Prakrti. A karmic nature causing power of committing abnormal activity in the state of somnambulism.दर्शनावरण कर्म की उत्तर प्रकृतियो मे एक प्रकृति, जिसके निमित्त से स्वप्न अवस्था मे विशेष श़िक्त प्रकट होती है और जीव सोता हुआ भी भयानक असाधारण कार्य करता है उसे स्तयानगृद्वि निद्र कहते है।
उद्यापन Vow completing ceremony. किसी व्रत के पूर्ण होने के पश्चात दानादि के साथ किया जाने वाला अनुष्ठान।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चकवा A large orange-brown duck, the Sheldrake, the significant symbol of Lord Sumatinath. सुमतिनाथ भगवान का चिन्ह।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
त्रसदशक Ten types of particular Karmic nature (related to mobile beings-Trasa). त्रस , बादर, , पर्याप्त , प्रत्येक, स्थिर, शुभ, सुभग, सुस्वर, आदेय, यशः कीर्ति कर्म प्रकृतियाँ। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चारू Elegant, Graceful, A king of Kuru dynasty. प्रिय , शानदार , कुरुवंश का एक राजा ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
त्रैलोक्य दीपक A book written by Vamdeva. वामदेव (ई. 13-14) द्वारा रचित एक ग्रंथ। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चेतनपुद्गल धमाल A book written by Buchiraj in 1532. बूजिराज द्वारा ई.सन् १५३२ में अर्चित एक ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
त्रिषष्ठि शलाका पुरूष Sixty three great personages (who attain salvation through any birth). 24 तीर्थंकर + 12 चक्रवर्ती +9 नारायण +9 प्रतिनारायण +9 बलभद्र ये 63 महापुरूष 63 शलाकापुरूष कहलाते है। प्रथमानुयोग के ग्रंथों में इनका वर्णन पाया जाता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संचारगति – Sanchaaragati. Speed transmission or movement. गति के अनेक भेदों में एक भेद “