निश्चयगुरु!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चयगुरु – Nishchayaguru. One having absolute perception of knowing himself. निश्चय से आत्मा ही आत्मा का गुरु है क्योंकि मोक्ष सुख का ज्ञान कर स्वयं ही उसे परम हितकर ज्ञान उसकी प्राप्ति में अपने को लगता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चयगुरु – Nishchayaguru. One having absolute perception of knowing himself. निश्चय से आत्मा ही आत्मा का गुरु है क्योंकि मोक्ष सुख का ज्ञान कर स्वयं ही उसे परम हितकर ज्ञान उसकी प्राप्ति में अपने को लगता है “
उदराग्नि प्राशमन वृत्ति Pacification of hunger. साधु वृत्ति उदराग्नि का निःस्वाद भोजन से प्रशमन करना (मिटाना)। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
देवसेवा Eulogical worshipping of Lord Arihant. देवपूजा , अभिषेक व 8 द्रव्य से पूजन,स्तुति करना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निश्चय उपगूहन – Nishchaya Upgoohana. Absolutely free from all passion. मुनि अवस्था में सिद्धों की अर्थात् शुद्धात्मा की भक्ति से युक्त होना और रागादी भावों से युक्त नहीं होना अर्थात् अपने निरंजन-निर्दोष आत्मा को दूषित करने वाले मिथ्यात्व रागादि विभावधर्मों का विनाश करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शशि – Shashi. The Moon, A king of Ikshvaku dynesty. चंद्रमा, इक्ष्वाकुवंशी एक राजा जो रवितेज का पुत्र था “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निवृत्त्यपर्याप्त – Nirvrttyapaparyaapta. Period of completion of eligible state (i.e. 6 Paryaptis) for body making in (Antarmuhurta). पर्याप्ति नामकर्म के उदय से युक्त जीव के जब तक शरीर पर्याप्ति पूर्ण न हो उतने काल तक उसे निर्वृति अपर्याप्त कहते है (अर्थात्एक समय कम शरीर-पर्याप्ति सम्बन्धी अन्तर्मुहूर्त पर्यत्न काल)” इस अवस्था को सर्वज्ञ ही जानते…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रूद्र – 88 ग्रहो में एक, तीसरे रूद्र एवं तीसरे नारद का नाम, जिनदीक्षा लेने के उपरान्त संयम भ्रष्ट होकर रौद्र कार्य करने लगते है। ये दसवें विद्यानुवाद पूर्व का अध्ययन करते समय विशयासक्त होकर तप से भ्रष्ट हो जाते है। और नरकगामी होते है।रूद्र 11 होते है। Rudra-name of a planet, Name of…