वृत्तिलाभ क्रिया!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृत्तिलाभ क्रिया –VrttilabhaKriya An act of consecration, to observe the vows taken before the spiritual teacher. दीक्षान्वय की ४८ क्रियाओ में एक क्रिया, गुरु के द्वारा प्रदत्त व्रता को धारण करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृत्तिलाभ क्रिया –VrttilabhaKriya An act of consecration, to observe the vows taken before the spiritual teacher. दीक्षान्वय की ४८ क्रियाओ में एक क्रिया, गुरु के द्वारा प्रदत्त व्रता को धारण करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विचार –Vichaara.: Consideration, opinion, thoughts, reflection. किसी पदार्थ या विषय का चिन्तवन करना विचार कहलाता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विनयलालस – Vinayalalasa. Name of a saint among particular group of 7 saints. सप्त ऋषियों में एक, विनयलालस “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विक्रम – Vikrama.: Name of a poet, the writer of ‘Nemicharit Granth’ (a treatise). एक जैन कवि ,नेमिचरित ग्रन्थ के रचयिता “
त्रिकोण रचना To pay reverence three times a day. उदयागत कर्म निषेकों की त्रिकोण रचना, एक एक घटता हुआ निषेक उदय में आना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] विकल – Vikala.: Deficient,Inadequate,Deprived of a part. अधूरा या किसी भाग अथवा अंश से वंचित ,सदोष “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पूर्वाषाढ – Purvasarha. Name of a lunar. एक नक्षत्र का नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाना-जीव नाना-अजीव – Nana-Jiva Nana-Ajiva Theory of many animates and inanimates अनेक जीव और अनेक अजीव ”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == श्रद्धा : == जं सक्कइ तं कीरइ, जं न सक्कइ, तयम्मि सद्दहणा। सद्दहमाणो जीवो, वच्चइ अयरामरं ठाणं।। —धर्म संग्रह : २-२१ जिसका आचरण हो सके, उसका आचरण करना चाहिए एवं जिसका आचरण न हो सके, उस पर श्रद्धा रखनी चाहिए। धर्म पर श्रद्धा रखता हुआ जीव भी जरा…