पंच अग्नि!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंच अग्नि – Pancha Agni. Five kinds of fire, Five fold conducts observed by jain Acharyas. पांच प्रकार की अग्नि ” जैसे जैन धर्मके अनुसार पंचाचार को पंचाग्नितप भी कहते है ” जिनका पालन प्रमुखता से आचार्यगण करते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंच अग्नि – Pancha Agni. Five kinds of fire, Five fold conducts observed by jain Acharyas. पांच प्रकार की अग्नि ” जैसे जैन धर्मके अनुसार पंचाचार को पंचाग्नितप भी कहते है ” जिनका पालन प्रमुखता से आचार्यगण करते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूत्ररूचि – Sutra Ruchi. Right perception generated through the scripture listening. सूत्रसम्यग्दर्शन, मुनि के चारित्रानुष्ठान को सूचित करने वाले आचार सूत्र को सुनकर जो तत्वार्थश्रद्धान होता है, उसे सूत्र रूचि सम्यग्दर्शन कहा जाता है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकाश्य – Prakashya. Liable to be revealed. प्रगट करने योग्य “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == ध्यान : == मोक्ष: कर्मक्षयादेव, स चात्मज्ञानतो भवेत्। ध्यानसाध्यं मतं तच्च, तद्ध्यानं हिममात्मन:।। —योगशास्त्र : ४-११३ कर्म के क्षय से मोक्ष होता है, आत्मज्ञान से कर्म का क्षय होता है और ध्यान से आत्मज्ञान से कर्म का क्षय होता है और ध्यान से आत्मज्ञान प्राप्त होता है। अत: ध्यान…
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीरमातंडी –Viramatamdi Name of a Kannad commentary book written by Chamundarai. चामुंडराय (ई. श. १० – ११) द्वारा रचित गोमट्टसार की कन्नड़ वृत्ति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पिशाच देव – Pisaca Deva. A type of peripatetic deities. व्यंतर देवों के दस भेदों में से एक भेद “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विषम द्रष्टांत – Vishama Drstamta. An odd example of an event. जो दार्ष्टान्तिक के सदृश न हो उसे विषम द्रष्टांत कहते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूक्ष्म बादर स्कन्ध – Sukshma Baadar Skandha. Invisible existing matters like air, words etc स्कन्धों के 6 भेदों में से एक भेद । जो स्कन्द दिखाई न दे परन्तु उनका कार्य प्रगट हो जेसे हवा, शब्द आदि ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मित्र : == सोसउ मा सोसउ च्चिय सलिलं रयणायरस्स बडवऽग्गी। जं लहइ जले जलणो तेण च्चिय किं न पज्जत्तं।। —गाहारयण कोष : ४० हे बडवाग्नि ! तू समुद्र के जल को सोख या न सोख, पानी में तुझे जो आग मिलती है अर्थात् दुश्मन के घर में अपना…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सत्यमित्र – Satyamitra. Name of the 41st chief disciple of Lord Risabhdev. भगवान ऋषभदेव के 41वें गणधर “