बीजरूचि!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बीजरूचि – Bijaruci A type of noble persons who get right faith by knowing bijapadas दर्शनार्य का एक भेद ; बिजपदों के ग्रहणपूर्वक सूक्ष्मार्थ तत्त्वार्थ श्रध्दान को प्राप्त करने वाले बिजरुची कहलाते हैं “.
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बीजरूचि – Bijaruci A type of noble persons who get right faith by knowing bijapadas दर्शनार्य का एक भेद ; बिजपदों के ग्रहणपूर्वक सूक्ष्मार्थ तत्त्वार्थ श्रध्दान को प्राप्त करने वाले बिजरुची कहलाते हैं “.
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परक्रम: Observing austerity sequentially as expounded in the scriptures. आगम में प्रतिपादित क्रम से तप करना, जैसे पहले मूलगुणों का पालन कर उत्तरगुणों को पालना ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पृथु – Prthu. The 15th son of Krishna’ brother (Baldev), Name of kings of Kura & Yadu dynasties, Broad, spa- cious. क्रष्ण के भाई बलदेव का १५ वाँ पुत्र ” कुरुवंशी एवं यदु (यादव) वंशी राजाओं का नाम, चौडा, विस्तृत “
आसन्न मरण Supreme beings, who get salvated in short time. जो साधु संघ से भ्रष्ट हो बाहर निकल गया ऐसे स्वच्छन्द, कुशील व संसक्त साधु का मरण।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्यान – Niryaana. To grt free from worldly tranmigration. संसार पर्यटन से निकल जाना निर्यान कहलाता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाद्रवन – सिंह – निष्क्रीडित वृत – Bhadravana-Niskridita Vrata. A vow (fasting) to be performed with particular procedure. एक विशेष विधि एंव क्रम से किया जाने वाला व्रत ” व्रतविधान संग्रह से इसकी विधि देखें “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निर्मल जल – Nirmala Jala. Pure & holy water of river etc. (an excellence of Lord-Arihant). 14 देवकृत अतिशियोंमें एक अतिशय; तलब आदि का जल निर्मल हो जाना “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पद्मोत्तर:A Deggajendra mountain situated in Bhadrashal forest, A ruler’Nagendradev; of Rajatprabh Summit of Kundal mountain, A deity resident of Nandyavart summit of Ruckak mountain. भद्रशाल वन में स्थित एक दिग्गजेन्द्र पर्वत, कुण्डल पर्वत स्थित रजतप्रभ कूट का स्वामी नागेन्द्रदेव, रूचक पर्वत के नन्द्यावर्त कूट पर रहने वाला देव ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भगीरथ – Bhagiratha. The son of the king Sagar , a chakravarti (em-peror). सगर चक्रवर्ती का पुत्र जिसने अपना पूर्वभव सुनकर दीक्षा ली एंव मोक्ष प्राप्त किया “