रविषेण!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रविषेण – वि सं 734 में पùपुराण के रचियता एक आचार्य। Ravisena- name of an Acharya who wrote Jain Ramayan called as ‘Padmapuarn’
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रविषेण – वि सं 734 में पùपुराण के रचियता एक आचार्य। Ravisena- name of an Acharya who wrote Jain Ramayan called as ‘Padmapuarn’
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षड्ज – Sadja. One of the 7 notes or tons of music. संगीत के सप्त स्वरों में एक स्वर “
तीर्थंकर नामकर्म प्रकृति Auspicious Karmic nature causing the state of Tirthankar (Jaina -Lord). नामकर्म की एक पुण्य प्रकृति, इसका बंध सोलहकारण भावना भाने से होता है। ऐसे परिणाम केवल मनुष्य भव में और वहाँ भी किसी तीर्थंकर अथवा केवली के पादमूल में ही होने संभव है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट्कारक – Satkaaraka. Six kinds of cases (of grammar). कर्ता, कर्म, करण,सम्प्रदान,अपादान और अधिकरण “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्वेतवाहन – Shvetavaahana. A king of Champanagri (a city) who got omniscience. चम्पानगरी का राजा, दीक्षा धारण कर केवलज्ञान प्राप्त किया “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रासाद- महल, र्इटों और पत्थरों के बने हुए आवासों को प्रासाद कहते है। Prasada- Palace, a palatial building
द्रव्य सम्यग्दृष्टि One having keen desire & eligible talent for getting right perception. जो जीव अपने कल्याण का इच्छुक है अर्थात् जिसमें आगामी काल में सम्यक्त्व होने की योग्यता है। यह द्रव्य निक्षेप की अपेक्षा कथन है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रेयोविधा – Shreyovidhaa. Name of a treatise written by Acharya Abhayanandi Ji of Nandi group. नंदिसंघ देशीयगण के आचार्य अभयनंदि द्वारा रचित अनेक कृतियों में एक कृति, समय – ई. 930-950 “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रारब्ध योगी- शुद्धात्मा भावना के प्रारम्भक और सूक्ष्म सविकल्प अवस्था में सिथत पुरुश। Prarabdha yogi- One engrossed in meditation inabsolutely