दिव्यपुर!
दिव्यपुर A part of Samavasarana, assembly of Lord Arihant. समवसरण का एक भाग।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दिव्यपुर A part of Samavasarana, assembly of Lord Arihant. समवसरण का एक भाग।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] पौरुषवाद – Paurushvada. A doctrine believing in the principle of ‘ work is worship’. एक सांख्यमत ” जो दैव, कर्मोदय को न मानकर मात्र पुरुषार्थ से ही कार्य की सिध्दी मानते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वचन प्रत्याख्यान – Vachan Pratyaakhyaana.: Utterance for not repeating something wrong. प्रत्याख्यान (त्याग) का एक भेद; में भविष्य में अपने व्रतों में अतिचार नहीं लगाऊंगा ऐसा बोलना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निष्प्राण – Nishpraana. Lifeless. निर्जीव अर्थात् जिसमें प्राण न हो “
त्रिकरण Three types of pure attitudes of soul involved in penance. जीव के तीन प्रकार के विशुद्ध परिणाम, अधःप्रवृत्तकरण, अपूर्वकरण, अनिवृत्तिकरण। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वृषभदेव–Vrsabhadeva. Name of the 1stTirthankar( Jaina – Lord), the son of king Nabhiral& queen Marudevi. भरतक्षेत्त चोबीसो के प्रथम तीर्थकर कुलकर नाभिराय रानी मरूदेवी के पुत्र जिनके ॠषभदेव , पुरुदेव , आदिनाथ आदि नाम प्रसिद्ध हैं बी”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वक्ता –Vaktaa: Orator , Speaker , Instructor ,One well –versed in scriptures . शास्त्रों का व्याख्याता ;सर्वज्ञ तीर्थंकर केवली .श्रुतकेवली और आरातीय आचार्य वक्ता के तीन भेद हैं ” सामान्य रूप से किसी भी भाषण करने वाले को भी वक्ता कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुवनकीर्ति – Bhuvanakirti. Disciple of Acharya Sakalkirti and preceptor of Gyanbhushan. नन्दिसंघ बलात्कार गण में आचार्य सकलकीर्ति के शिष्य व ज्ञानभूषण के गुरु (ई. १४४२-१४६८) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाचिराज – Naciraja A kannad poet who wrote a commentary book on ‘Amorkosh’ in kannad. कन्नड़ जैन कवि; उमरकोश की कन्नड़ टिका के कर्ता “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनःशुद्धि – Manahsuddhi. Mental purity. छल कपट आदि समस्त बुरे भावो से विरक्त होना “