त्रिकालज्ञता!
त्रिकालज्ञता To have unlimited knowledge of present, past and future. तीनों कालों का ज्ञान होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिकालज्ञता To have unlimited knowledge of present, past and future. तीनों कालों का ज्ञान होना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मृषावाद–Mrashavaad. False word or utterance, Untruism, a False theory. असत्य कहना”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मृत्यु : == सीहस्स कमे पडिदं, सारंगं जह ण रक्खदे को वि। तह मिच्चुणा य गहिदं जीवं पि ण रक्खदे को वि।। —द्वादशानुप्रेक्षा : २४ जैसे सिंह के पैर के नीचे पड़े हुए हिरण की कोई भी रक्षा करने वाला नहीं होता, वैसे ही मृत्यु के द्वारा ग्रहण…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थूल अब्रह्म- Sthuula Abrahma. Licentiousness, bad conduct.अपनी स्त्री के अलावा अन्य स्त्रियो के प्रति बुरी दृष्टि रखना या कुदृष्टि से उन्हे देखना। श्रावक इससे विरक्त होते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाड़ी – Nari Pulse, Nerve, measurment unit of time. देहस्थित शिरा. समय का एक मापन ”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावलिंग (वेद) – Bhavalinga (Veda). Thoughts due to partial passion. जिसकी स्तिति नोकषाय के उदय से प्राप्त होती है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == शांत आत्मा : == सव्वत्थ वि पियवयणं, दुव्वयणे दुज्जणे वि खमकरणं। सव्वेिंस गुणगहणं, मंदकसायाण दिट्ठंता।। —कार्तिकेयानुप्रेक्षा : ९१ — सब जगह प्रिय वचन बोलना, दुर्जन के दुर्वचन बोलने पर भी उसे क्षमा करना, और सबके गुण ग्रहण करते रहना—यह मंदकषायी (शांत स्वभावी) आत्मा के लक्षण हैं।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्थिति बंध – Sthiti Bamdha. Binding period of karmas with soul.कर्मबंध के 4 भेदो मे एक भेद। कर्मों मे कषायो के अनुसार मर्यादा का पड़ना। अर्थात् अपने स्वभाव को नही छोड़ते हुए जितने काल तक कर्म आत्मा के साथ बंधे रहते है उसे स्थितिबंध कहते है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मिश्र पाहुड–Mishra Paahud. Gift with animate and inanimate object. प्राभृत; स्वर्ण के साथ हाथी और घोड़े का उपहार रूप से भेजना”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मिश्र मोहनीय–Mishra Mohneeya. See – Mishra Prakrati. देखे– मिश्र प्रकृति”