चारित्रपाहुड़!
चारित्रपाहुड़ A book written by Acharya Kundkund. आचार्य कुन्दकुन्द (ई. १२७-१२९) द्वारा रचित एक ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
चारित्रपाहुड़ A book written by Acharya Kundkund. आचार्य कुन्दकुन्द (ई. १२७-१२९) द्वारा रचित एक ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] मध्यम पारीषद् – Madhyam paarishad. A type of council of deities. देवों के परिषद् (सभा) के तीन भेदों में एक भेद ; इसे चंदा नाम से जाना जाता है , इसमें बहुधा अन्तःपुर के महत्तर होतें है जो बेंतरूपीलता को हाथ में ग्रहण करके कंचुकी की पोषाक पहने हुए हैं “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मेरुधन–Merudhan. Name of a chief disciple of Lord Adinath. भगवान्आदिनाथ के एक गणधर का नाम”
ग्रैवेयिक स्तूप A special structure of Samavasharan-holy assembly of Lord. ग्रैवेयिक विमान के आकार का समावशरण का स्तूप ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] समता परिणाम – Samataa Parinaama. Harmonious or equnimous, temperaments. माघ्यस्थ भाव। अपने आत्मा मे तथा सर्व जीवो मे समभाव अर्थात् समता परिणाम होना।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पदविभागी: A kind of Criticism, A kind of good conduct of saint. आलोचना का एक भेद, क्षेपक क्षरा आचाय्र्र के आगे क्रम से दोषो की आलोचना करना, साधुओं के क्षरा की जाने वाली समाचारी विधि का एक भेद, समस्त दिन एवं रात की परिपाटी में मुनियों क्षरा नियामें का निरन्तर आचरण करना ।
दर्शन – ज्ञान-चारित्र Three jewels of Jainas (Right faith, Right knowledge & Right conduct ). रत्नत्रय सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यग्चारित्र इन तीनों गुणों को रत्नत्रय कहते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पतिव्रत: Loyalty of fidelity to a husband-a characteristic of India calture. भारतीय संस्कृति में नारी का एक विषेष धर्म अपने पति के प्रति एकनिश्ठ समर्पण एवं भक्ति का भाव रखना व अन्य पुरूष के प्रति पिता, पुत्र एवं भाई के समान भाव एवं व्यवहार रखना ।