यतिधर्म!
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यतिधर्म–Yatidharm. Observances of ascetic life. मुनिधर्म; आरम्भ परिग्रह का त्यागकर 5 महाव्रत 5 समिति 3 गुप्तियों का पालन करना”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यतिधर्म–Yatidharm. Observances of ascetic life. मुनिधर्म; आरम्भ परिग्रह का त्यागकर 5 महाव्रत 5 समिति 3 गुप्तियों का पालन करना”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्लक्षणकूला – सिखरी पर्वत के कूट तथा देवी का नाम Plaksanakula- Name of a summit and female deity of shikhari mountain
[[श्रेणी:शब्दकोष]] याचनी भाशा – अनुभय भाशा का एक भेद, इस तरह के प्रार्थना पूर्ण वचनों को कहना। Yacani Bhasa- Requesting language (pertaining to some material)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संक्रांति – Sankraanti. Transition, Change. संचार, गमन, परिवर्तन ” इसके अर्थ, व्यंजन, योग संक्रांति तीन भेद हैं ” यह परिवर्तन प्रथम शुक्लध्यान पृथत्तववितर्क वीचार में होता है ” प्रत्येक मास में सूर्य का एक राशि से दूसरी राशि में संचार करना भी संक्रांति कहलाता है “
दंषमशक – परीषह To tolerate insect-bite affliction. 22 परीषह में एक परीषह , मच्छर , मक्खी, बिच्छू, चींटी आदि के द्वारा की गयी बाधा को बिना प्रतिकार किये सहन करना एंव मन, वचन, काय से उनको बाधा न पहुंचना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधस्वामित्व- कर्म सिद्धान्त विषयक एक ग्रंथ। Bandhasvamitva- Name of a book
दिवाकरनंदि Disciple of Chandrakirti and spiritual teacher of Shubhchandra. ई. 1068-1098 में चन्द्रकीर्ति के शिष्य तथा शुभचन्द्र के गुरू थे। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संकर दोष – Sankara Dosa. Hybridisation- a fault. किसी धान्य, फल, पुष्प अथवा जाति में दो भिन्न-भिन्न प्रकार की वस्तु या जाति के सम्मिश्रण से संकर दोष होता है ” जैसे दो प्रकार की गुलाब की कलम का मिश्रण कर लगाने से तीसरे रंग का पैदा हुआ गुलाब संकर कहलाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] राग – प्रेम, प्रीति, स्नेह, माया, व लोभ कशाय तथा हास्य, रति व तीन वेद से प्राप्त भाव। Raga-Attachment, passion, love, Affection
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षण्णवति प्रकरण – Sannavati Prakarana. Name of a book written by Acharya Somsen. आचार्य सोमसेन (ई. 943-968) कृत न्याय विषयक एक ग्रंथ “