सहस्रबाहू!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहस्रबाहू – Sahasrabaahoo. Father’s name of the 8th Chakravarti (emperor) Subhaum. 8 वें चक्रवर्ती सुभौम के पिता ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहस्रबाहू – Sahasrabaahoo. Father’s name of the 8th Chakravarti (emperor) Subhaum. 8 वें चक्रवर्ती सुभौम के पिता ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सहसातिचार – Sahasaatichaara. Sudden inclination towards inauspicious thoughts & speech. अशुभवचन और अशुभ विचारो में वचन की और मन की तत्काल अविचार पूर्वक प्रवृत्ति होना, इसको सहसातिचार कहते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्ध्यक्षर – अक्षर के तीन भेदो मे एक भेद, सूक्ष्म निगोेद लब्ध्यापर्याप्तक से लेकर श्रुत केवली तक जीवो के जितने क्षयोपषम होते है उन सबकी लब्ध्यक्षर संख्या है। Labdhyaksara- Destructional cum subsidential state of karmas of all beings
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रामाण्य भंग- आचार्य अनन्तकीर्ति (ई.श. 8 मध्यपाद) द्वारा रचित एक ग्रंथ। PramanyaBhanga- A book written by acharyaAnantkriti
दिवा मैथुन त्याग Renouncement of sensual enjoyment during day time (6th model stage of householders). श्रावक की 11 प्रतिमाओं में छठी प्रतिमा दिन में मैथुन सम्बन्धी चेष्टा का त्याग करना (कहीं इस प्रतिमा का नाम रात्रिभुक्ति त्याग भी है)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्राभृतप्राभृत- श्रुतज्ञान के 20 भेदों में 13 वाँ भेद, यह ज्ञान अनुयोग समास ज्ञान में एक अक्षररुप श्रुतज्ञान की वृद्धि होने से होता है। PrabhrtaPrabhrta- A type of Scriptural Knowledge (shrutgyan)
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भाव नमस्कार – Bhava Namaskara. Psychical reverence or adoration for Lord Arihant. मन के द्वारा पंचपरमेंष्ठी के गुणों का स्मरण करना “
ऊर्ध्वव्यतिक्रम Exceeding the limits set in the direction, namely upwards. दिग्व्रत का तीसरा अतिचार लोभवश ऊपर की सीमा का उल्लंघन करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्राणावाय पूर्व- 14 पूर्वो में से बारहवाँ पूर्व, जिसमें षरीर चिकित्सा आदि अश्टांग आयुर्वेद, भूतिकर्म, जागुलिक कर्म (विश विद्या) और प्राणायाम के भेद प्रभेदों का वर्णन होता है। Pranavayapurva-A (purva) part of scriptural knowledge (Shrutgyan)