त्रिखंडाधिपति!
त्रिखंडाधिपति Three Mlechchhakhand divisions. भरत-ऐरावत आदि क्षेत्रों के तीन खंडों के अधिपति राजा, प्रतिनारायण ये तीन खंडो के अधिपति होते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
त्रिखंडाधिपति Three Mlechchhakhand divisions. भरत-ऐरावत आदि क्षेत्रों के तीन खंडों के अधिपति राजा, प्रतिनारायण ये तीन खंडो के अधिपति होते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्यान – Vidhana. Arrangement, Particular procedural worshipping in Jainism, Ruling. किसी कार्य का आयोजन, अनुष्ठान, पूजा, कानून “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावबंध – Bhavabamdha. Psychical bondage of Karmas. जिस चेतन परिणाम से कर्म बंधता है वह भाव –बंध है ” जैसे- क्रोधादि परिणाम भाव बंध कहलाते हैं अर्थात् आत्मा के शुध्द – अशुध्द परिणामों से जो कर्म का बंध होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाभिकमल – Nabhikamala Navel place, the center point of all Mantras (mystic words) नाभि जहाँ से मंत्रो के उच्चारण को बताया गया है, नाभि स्थान; पदस्थ ध्यान मंत्रो के स्थान योग्य 10 स्थानों में एक स्थान ”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == मुधाजीवी : == दुर्लभा तु मुधादायिन:, मुधाजीविनोऽपि दुर्लभा:। मुधादायिन: मुधाजीविन:, द्वावपि गच्छत: सुगतिम्।। —समणसुत्त : ४०४ मुधादायी—निष्प्रयोजन देने वाले दुर्लभ हैं और मुधाजीवी—भिक्षा पर जीवनयापन करने वाले भी दुर्लभ हैं। मुधादायी और मुधाजीवी, दोनों ही साक्षात् या परम्परा से सुगति या मोक्ष प्राप्त करते हैं।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिशिष्ट – Pratishishta. See – Pratichhanda. देखें – प्रतिछंद “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नागोजी भट्ट – Nagoji Bhatta Name of the Commentator, the promoter of Yoga philosophy. योगदर्शन के साहित्यक प्रवर्तक (ई.श.17), इन्होंने छाया व्याख्या नमक टिकाएँ लिखी ”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भिण्डिमाला – Bhindimala. Name of a weapon of the era of Ram. राम के समय का एक शस्त्र “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिरूपक व्यवहार – pratirupaka Vyavahaara. Trade with adulteration. अचौर्यागुणव्रत का एक अतिचार; असली वाटू में नकली वस्तु मिलाकर बेचना, जैसे-सोने में ताँबा मिलकर बेचना “