आभोग!
आभोग Conducting ritual activities with wrong intention. पूजा महत्व आदि की अभिलाषा से कापोत लेश्यायुक्त भावों द्वारा अति प्रकट अनुष्ठान करना अर्थात् गलत कार्रू करना आभोग है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आभोग Conducting ritual activities with wrong intention. पूजा महत्व आदि की अभिलाषा से कापोत लेश्यायुक्त भावों द्वारा अति प्रकट अनुष्ठान करना अर्थात् गलत कार्रू करना आभोग है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूढ़–Muudh. Ignorant, a stupid person. अज्ञानी, देह को आत्मा मानने वाला, द्रव्य गुण पर्यायों से तत्व की अप्रतिपत्ति होना, सूझबूझ से हीन”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] परमौदारिक शरीर:Body of Lord Arihant with absolute purity.अहंत परमात्मा का शरीर जिसमें निगोदिया जीव नहीं रहते ,धातु उपधातु सब शुद्व हो जाती है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] प्रकाश्य – प्रकाशक भाव – Prakasya- Prakashka Bhava. Relation of illuminating objects & means of illu-mination. कार्य – कारण संबंध; प्रकाश्य पदार्थ है और, प्रदीप, सूर्य, चन्द्र आदि प्रकाशक हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भामंडल – Bhamamdala. Name of Seeta’s brother, An auspicious em-blem of Lord Arihant. सीता का भाई, अष्ट प्रातिहायों में एक प्रातिहार्य “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मेय–Meya. Measurable substances. मेय, देश, तुला, कालचतुर्विधमानो में एक भेद; प्रस्थ आदि के द्वारा मापने योग्य वस्तु मेय कहलाती है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भय विनय – Bhaya Vinaya. Reverence due to fear. भय के कारण विनय करना “
एकचर्या A vow for saints, solitary walking. मुनियों का एक व्रत, एकाकी विहार करना।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विद्युद्दंष्ट्र – Vidyuddanstra. Name of a vidyadhar king. एक विद्याधर, ध्यानस्थ मुनि संजयन्त पर घोर उपसर्ग किया ” धरणेन्द्र ने कुध्द होकर समस्त विद्याएं हर ली मारने को तैयार हुआ पर आदित्यप्रभ देव ने उसे आकर बचा लिया ” अपरनाम – विद्युददृ्ढ “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भगदत्त – Bhagadatta. Name of a chief disciple of Lord Rishabhadev. भगवान ऋषभदेव के एक गणधर का नाम “