दश करण!
दश करण Ten operational Karmic activities. कर्म की 10 अवस्थाएं, बन्ध , उत्कर्षण , संक्रमण, अपकर्षण, उदीरणा, सत्व, उदय, उपशम, निधत्ति और निःकाचना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दश करण Ten operational Karmic activities. कर्म की 10 अवस्थाएं, बन्ध , उत्कर्षण , संक्रमण, अपकर्षण, उदीरणा, सत्व, उदय, उपशम, निधत्ति और निःकाचना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
चन्द्रप्रज्ञप्ति A type of scriptural knowledge (Shrutgyan), A Shvetambar book and also the name of a book written by Acharya Amitgati. अंगश्रुत ज्ञान का एक भेद; इसमें की आयु , परिवार , ऋद्धि आदि का लाख ५००० पदों में वर्णन झाई , एक श्र्वेताम्बर ग्रन्थ एवं आचार्य अमितगति द्वारा रचित एक ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्याख्यानावरण कशाय- pratyakhyanavarana kasaya Passions obscuring or causing destruction of complete right conduct. जो कशाय सकल चारित्र का घात करे, इसके क्रोध आदि भेद है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बालुकाप्रभा – Balukaprabha. Name of the 3rd hellish land. तृतीय नरम भूमि, अपरनाम मेघा है यह २८००० योजन मोटी है “
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यथातथानुपूर्वी–Yathatathanupurvi. See – Yatrattranupurvi. देखें –यत्रतत्रानुपूर्वी”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संस्तर – Sanstara. Bed, Dry grass bed. शय्या ” दिगम्बर जैन साधुओं का संस्तर तृण, चटाई आदि का होता है “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सत्संग : == धुनोति दवयुं स्वान्तात्तनोत्यानंदथुं परम्। धिनोति च मनोवृत्तिमहो साधु—समागम:।। —आदिपुराण : ९-१६० साधु पुरुष का समागम मन से संताप को दूर करता है, आनन्द की वृद्धि करता है और चित्तवृत्ति को संतोष देता है।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वसंवेद्य सुख – Svsammvedya Sukha. Spiritual bliss. अतीन्द्रिय या आत्मिक सुख। निर्विकल्प ध्यान मे स्थित परम योेगियो के रागदि के अभाव से उत्पन्न स्वसंवेद्य आत्मिक सुख है।
दर्शन गुण Characteristics of the right faith.प्रशम, संवेग, आस्तिक्य, अनुकंपा ये 4 सम्यग्दर्शन के गुण हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यतिपूजा–Yatipuja. Eulogical devotion for saints. शुभ परिणामों से गुरु की पूजन करना”