सम्यग्मिथ्यात्व प्रकृति!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सम्यग्मिथ्यात्व प्रकृति – Samyagmithyaatva Prakriti. Right-cum-wrong Karmic nature related to faith. दर्शन मोह की दूसरी प्रकृति जिसके उदय से यथार्थ व मिथ्या दोनो प्रकार का मिश्रित श्रद्वान है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सम्यग्मिथ्यात्व प्रकृति – Samyagmithyaatva Prakriti. Right-cum-wrong Karmic nature related to faith. दर्शन मोह की दूसरी प्रकृति जिसके उदय से यथार्थ व मिथ्या दोनो प्रकार का मिश्रित श्रद्वान है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुख मण्डप–Mukh Mandap. Canopy type space in front of situated–idol of Jaina Lord. अकृत्रिम जिनमंदिरो मेंगर्भ गृह जहा प्रतिमा विराजमान रहती है उसके आगे का मण्डप”
चातुर्मासिक प्रतिक्रमण See – Caturmåsika Pratikrama¿a. देखें-चतुर्मासिक प्रतिक्रमण।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पर्ष भाव विधान – Sparssana Bhaava Vidhaana. A type of Anuyogdwar (disquisition door).देखे- स्पर्ष अंतर विधान।
त्रिखंड A particular triangular sequence of the fruition of Karmas. तीन म्लेच्छखण्डों को त्रिखण्ड कहते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुख्य धर्मध्यान – Mukhya Dharmdhyan. A type of righteous meditation; mental, meta–physical involvement. धर्मध्यान के दो भेदो (मुख्यऔर उपचार) में एक भेद; आध्यात्मिकता की और मन को एकाग्र करना” इसे निश्चय धयन भी कहते है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वेद – Veda Gender. लिंग ” स्त्री लिंग , पुरुष लिंग, नपुंसक लिंग”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] स्पर्ष गति विधान – Sparssa Gati Vidhaana. type of anyyogdwar (disquisition door).देखे- स्पर्श अंतर विधान।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नाभांत – Nabhamta A city in the south of Vijayardh mountain विजयार्ध की दक्षिण श्रेणी का एक नगर ”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == विवेक : == नो छादयेन्नापि च लूषयेद् , मानं न सेवेत प्रकाशनं च। न चापि प्राज्ञ: परिहासं कुर्यात् , न चाप्याशीर्वादं व्यागृणीयात्।। —समणसुत्त : २३९ (अमूढ़दृष्टि या विवेकी) किसी के प्रश्न का उत्तर देते समय न तो शास्त्र के अर्थ को छिपाए और न अपसिद्धान्त के द्वारा शास्त्र…