रत्नि!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नि – क्षेत्र का प्रमाण विषेश। एक हाथ का परिमाण 2 वितस्ति=1 हाथ। इसका मूल नाम अरत्नि है। Ratni- A measurement unit of area
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नि – क्षेत्र का प्रमाण विषेश। एक हाथ का परिमाण 2 वितस्ति=1 हाथ। इसका मूल नाम अरत्नि है। Ratni- A measurement unit of area
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निरावरण – Niraavarana. Univeiling, Uncovered. आवरण से रहित (केवल ज्ञान), मुनियों के द्वारा बिना आवरण के शयन करना कायक्लेश तप का एक लक्षण है”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योग – मन, वचन काय के निमित्त से होने वाली आत्मप्रदेषो के परिस्पन्दन की क्रिया। Yoga-Vibration in the soul points (caused by mind Speech & body)
देवावर्णवाद False allegations for heavenly deities. दर्शनमोहनीय कर्म के आस्रव का एक कारण स्वर्गलोक में रहने वाले देवी- देवता सुरापान करते हैं , मांस खाते हैं इस प्रकार देवगति के देवों पर मिथ्या आरोप लगाना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योग संक्रान्ति – योग सक्रान्ति प्रथम षुक्लध्यान में मन वचन काय योगो का पलटना। Yoga Samkramti- Transition of all activities (related to mind speech & body) in auspicious & sacred mode
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकादित्य –Lokaditya : Name of a king contemporary to Akaalvarsh. उत्तरपुराण की प्रशस्ति अनुसार अकालवर्ष के समकालीन एक राजा, आचार्य लोकसेन ने इनके समय में ही उत्तरपुराण को पूर्ण किया “समय –ई .898 “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] नरकगति – Niratagati. Destination of hell, hellish life course or destinity. नरकगति “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लोकबिंदुसार – Lokabindusaar. The 14th Purva (a part of Shrutgyan – scriptual knowledge) containing mathematical knowledge). 14वां पूर्व ,इसमें बारह करोड़ 50 लाख पद हैं “इन पदों में अंक राशि ,8 प्रकार के व्यवहार की विधि तथा राशि परिकर्म आदि गणित तथा समस्त श्रुत संपदा का वर्णन है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परिमाणगत प्रत्यय :A type of renunciation. प्रत्याख्यान का एक भेद “