देवद्विक!
देवद्विक Dyad of Karmic nature related to celestial destination. देवगति व आनुपूर्वी (देवगत्यानुपूर्वी)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
देवद्विक Dyad of Karmic nature related to celestial destination. देवगति व आनुपूर्वी (देवगत्यानुपूर्वी)। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सातिशय केवली – Saatisaya Kevale. A type of omniscient one. तीर्थकर प्रकृति रहित, 25 अतिशयो (केवलज्ञान, 14 देवकृत, 1 वज्रवृषभनाराच संहन), 4 प्रातिहार्य (छत्र, सिंहासन, भामंडल, दिव्यध्वनि), गन्धकुटी व अनन्त चतुष्टष् सहित सातिशय केवली होते है। अर्थात् अतिशय युक्त केवली को सातिशय केवली कहते है।
दृष्टिशक्ति Power of vision. दर्शन क्रियारूप शक्ति जिसमें ज्ञेयरूप आकार का विशेष नहीं हैं ऐसे दर्शनोपयोगमयी (सत्तामात्र पदार्थ से उपयुक्त होने स्वरूप ) है।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सात नय – Saata Naya. Seven particular kinds of standpoints. नैगम, संग्रह, व्यवहार, ऋजुसूत्र, शब्द, समभिरुढ़ और एवंभूत ये 7 नय है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भित्ति चित्र – Bhitti chitra. Stucco embellishment (decorative wall work). चित्रकला का एक भेद; इसमें दीवार पर विभिन्न रंगों से आक्रतियाँ चित्रित की जाती हैं “
ऊर्ध्वगमन Upward movement. शुद्ध या मुक्त जीव की गति- ऊपर गमन करना जीव का स्वभाव है मुक्त जीव लोक शिखर पर विराजता है।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
दंड – दंडी संबध Relation of infliction & inflicting one. जो वस्तु के स्वरूप में मिला न हो । दंड के सम्बन्ध से पुरूष को दंडी कहना। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]]हृस्व – Hrasva. A short vowel. एक मात्रा वाला वर्ण हृस्व होता है। अ, इ, उ,, ऋ, लू, ये पाॅच हृस्व अक्षर पाॅच लध्वक्षर के रुप मे प्रसिद्व है।