स्वार्थ!
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वार्थ – Svaartha. Spiritual upliftment of own soul. प्रोपकार की अपेक्षा न करके स्व-अर्थ अर्थात् आत्मकल्याण करना।
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वार्थ – Svaartha. Spiritual upliftment of own soul. प्रोपकार की अपेक्षा न करके स्व-अर्थ अर्थात् आत्मकल्याण करना।
द्रव्य उपशम A type of subsidence (reg. matters). निक्षेपों की अपेक्षा उपशम का एक भेद।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] स्वात्म रक्षा – Svaatma Raksaa. Self defence, the principle of non-violence. शुद्व भाव या आत्म रक्षा। आगम मे स्व और अन्य प्राणियो की अहिंसा का सिद्वान्त स्वात्म रक्षा के लिये ही है।
द्रविड़ संघ A group of Digambar Jain saints. दिगम्बर परम्परा के अन्तर्गत एक साधु संघ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सांवत्सरिक प्रतिक्रमण – Saamvatsarika Pratikramana. A type of repentance carried on annually by jain saints. प्रतिक्रमण के 7 भेदो मे छठा भेद । देखे- वार्षिक प्रतिक्रमण।
दोष Faults. त्रुटि , कमी, रागद्वेष आदि 18 दोष; अरिहंट परमात्मा इनसे रहित होते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिष्ठित प्रत्येक वनस्पति- जिस वनस्पति का आश्रय निगोद या साधारण वनस्पति रहे। pratisthita pratyeka vanaspati – general plant life (one sensed beings)
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सत्पुरुष : == दट्ठूण अण्णदोसं, सप्पुरिसो लज्जिओ सयं होइ। —भगवती आराधना : ३७२ सत्पुरुष दूसरे के दोष देखकर स्वयं में लज्जा का अनुभव करता है। (वह कभी उन्हें अपने मुंह से नहीं कह पाता)।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रतिष्ठा विधान- प्रतिश्ठा संबंधि- विधान। pratistha vidhana – reverential procedure for consecrational celebration
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रघुम्नचरित्र- आचार्य सोमकीर्ति (ई. 1474) एवं आचार्य सोमाकृति (ई. 1516-1556) द्वारा रचित ग्रंथ। pradyumnacaritra – name of the books written by (1) acharya somkirti, (2) acharya shubhachandra