पापास्त्रव!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पापास्त्रव – Papasrava. Influx of sinful Karmas. देखें- पाप आस्त्रव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पापास्त्रव – Papasrava. Influx of sinful Karmas. देखें- पाप आस्त्रव “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाप – Papa. Sinful activities, Moral guilt, Demerit. आत्मा को मलिन करने वाली अशुभ क्रिया; इसके ५ भेद है- हिंसा, झूठ, चोरी, कुशील, परिग्रह”
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मोह– Moha. Delusion, Attachment. सांसारिक वस्तुओ में ममत्व या मूर्छा भाव”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विध्यात संक्रमण – Vidhyata Sankramana. A type of transition (reg. soul with low purity). संक्रमण के ५ भेदों में एक भेद; मंद विशुध्दता वाले जीव की स्थिति – अनुभाग को घटाने रूप भूतकालीन स्थितिकाण्डक – अनुभागकाण्डक तथा गुणश्रेणी आदि परिणामों में प्रव्रत्ति होना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पात्रदान :Offering food etc. to worthy persons (ascetics etc).तपस्वी आदि सुपात्रो को आहारदि दान देना।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यत्याचार–Yatyachar. Name of a book written by Acharya Padmanandi – 7, Well conduct of saints, Great treatises containing description of saints’ conduct. आचार्य पद्मनंदी -7(ई. 1305) की एक रचना,साधुओ के आचार-विचार को यत्याचार कहते है” जिन ग्रंथों में यतियों के आचार आदि का वर्णन हो वे भी यत्याचार कहलाते है” जैसे- मूलाचार, भगवती…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाटलीपुत्र:Former name of patna, the capital of Bihar.बिहार प्रान्त की राजधानी वर्तमान पटना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाक्षिक:Fortnightly a type of Jaina householder (shavak).माह के पंद्रह दिवसीय पक्ष, श्रावक के 3 भेदो मे एक भेद, जो व्रती तो नही है लेकिन धर्म का पक्ष लेता है।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष]] == निर्लेप : == चरदि जदं जदि णिच्चं, कमलं व जले णिरुवलेवो। —प्रवचनसार : ३-१८ यदि साधक प्रत्येक कार्य यतना से करता है, तो वह जल में कमल की भाँति निर्लेप रहता है।