प्रत्याख्यान!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्याख्यान- pratyakhyana Resolution or determination (for not committing fault) आगामी काल दोश न करने की प्रतिज्ञा करना।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्याख्यान- pratyakhyana Resolution or determination (for not committing fault) आगामी काल दोश न करने की प्रतिज्ञा करना।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पदाति सेना: A part of army ( a troop). सेना की 7 कक्षाओं में एक कक्षा, इसमें पैदल सैनिक होते है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] व्यतिरेक द्रष्टांत – Vyatireka Drstainta An illustration pertaining to absence of goal showing absence of means (i.e. absence of fire shows absence of smoke). द्रष्टांत के दो भेदों में एक भेद, जहां साध्य के अभाव में साधन का अभाव बताया जाता है ” जैसे-जहां धूम नहीं है वहां अग्रि नहीं है, जैसे…
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == सज्जन-दुर्जन : == सुजणो वि होइ लहुओ, दुज्जणसंमेलणाए दोसेण। माला वि मोल्लगरुया, होदि लहू मउयसंसिट्ठा।। —भगवती आराधना : ३४५ दुर्जन की संगति करने से सज्जन का महत्व गिर जाता है, जैसे कि मूल्यवान माला मुर्दे पर डाल देने से निकम्मी—तुच्छ, त्याज्य हो जाती है। सरिसे वि मणुयजन्मे डहइ…
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पत्रपरीक्षा:Name of a book written by Acharya Vidyanand. आचार्य विद्यानन्द (ई0 775-840) कृत एक ग्रथ ।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यमदन्गि–Yamadgini. Father’s name of Parshuram. परशुराम के पिता का नाम”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] ब्राह्मी – Brahmi. Name of the daughter of Lord Rishabhadeva. इस युग की प्रथम आर्यिका साध्वी; भगवान ऋषभदेव की पुत्री, सर्वप्रथम पिता से लिपि विधा सीखी एंव प्रयाग नगरी में उन्हीं से दीक्षित होकर समवसरण की प्रथम गणिनी बनी “
[[श्रेणी: शब्दकोष]]स्वस्थान संक्रमंण – Svasthaana Sammkramana. A type of karmic transition. संक्रमण के दो भेदो मे एक भेद। स्वस्थान मे अर्थात् अपने ही अन्य संग्रहकृष्टियो मे संक्रमण करना अर्थात् तद्रूप परिणमन करनां।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पट्टावली:Different traditional of Acharyas. आचार्याे की परम्परा के नाम ।