श्मशान-निलय!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्मशान-निलय – Shmashaana-Nilaya. A type of vidyadhars of Matanga jati (a descendant). मातंग जाति विद्याधरों के 7 उत्तर भेदों में दूसरा भेद; ये धूलि धूसरित तथा श्मशान की हड्डियों से निर्मित आभूषणों से युक्त होते हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्मशान-निलय – Shmashaana-Nilaya. A type of vidyadhars of Matanga jati (a descendant). मातंग जाति विद्याधरों के 7 उत्तर भेदों में दूसरा भेद; ये धूलि धूसरित तथा श्मशान की हड्डियों से निर्मित आभूषणों से युक्त होते हैं “
द्रव्य मोक्ष Installation of supreme soul of Siddhashila. मोह का एक भेद जीव के द्रव्यादि सम्बन्धि मूढ़भाव । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संपराय – Sanparaaya. Passionful influx. संपराय कषाय व संसार को कहते है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रविष्ट – वंदना का एक अतिचार। अर्हतादि परमेशिठयों के अत्यंत निकट होकर वंदना करना। Pravista- An infraction of paying reverence, to be very near to the idol of lord Arihant , Acharyas etc
द्रव्य परिवर्तन Modification of material forms. द्रव्य की पर्याय का बदलना।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
गिरि A mountain, Name of the kings of Yadu & Hari dynasties. पर्वत, यदु (यादव) वंश एवं हरिवंश के राजाओं का नाम ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रत्यय- pratyaya Knowledge, cause, inter relation casual ज्ञान, श्रद्धा, निमित, कारण, हेतु। जैनागम में प्रत्यय अर्थात आस्त्रव कर्मों के आने के द्वार के लिए मुख्यत: प्रयुä होता है।
द्रव्यगुण Common & specific virtues of substance or matter. द्रव्य के गुण दो तरह के हैं सामान्य गुण जो छहों द्रव्यों में पाये जाते हैं विशेषगुण जो हर एक ही में पाये जाते हैं। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
दशलक्षण व्रत विधि एवं पूजा दशलाक्षणिकव्रते भाद्रपदमासे शुक्ले श्रीपंचमीदिने प्रोषध: कार्य:, सर्वगृहारम्भं परित्यज्य जिनालये गत्वा पूजार्चनादिकञ्च कार्यम्। चतुर्विंशतिकां प्रतिमां समारोप्य जिनास्पदे दशलाक्षणिकं यन्त्रं तदग्रे ध्रियते, ततश्च स्नपनं कुर्यात्, भव्य: मोक्षाभिलाषी अष्टधापूजनद्रव्यै: जिनं पूजयेत्। पंचमीदिनमारभ्य चतुर्दशीपर्यन्तं व्रतं कार्यम्, ब्रह्मचर्यविधिना स्थातव्यम्। इदं व्रतं दशवर्षपर्यन्तं करणीयम्, ततश्चोद्यापनं कुर्यात्। अथवा दशोपवासा: कार्या:। अथवा पंचमीचतुर्दश्योरुपवासद्वयं शेषमेकाशनमिति केषाञ्चिन्मतम्, तत्तु शक्तिहीनतयाङ्गीकृतं न…