बल प्राण!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बल प्राण- 10 प्राणों में 3 प्राण- मनबल, वचनबल, कायबल। Bala Prana- life vitalities
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बल प्राण- 10 प्राणों में 3 प्राण- मनबल, वचनबल, कायबल। Bala Prana- life vitalities
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रिश्टसमुच्चय – आचार्य दुर्गदेव कृत मन्त्र तन्त्र विशयक एक संस्कृत गं्रथ का नाम। समय 11 षताब्दी Ristasamuccaya-name of a book related to mystical theme
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बारस अणुवेक्खा- आचार्य कुन्दकुन्द (ई. 127-179) कृत वैराग्य विषयक एक ग्रन्थ । Barasa Anuvekkha- A book written by Acharya Kund-Kund
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नमाली – विद्याधर वंष का एक राजा Ratnamali- Name of a king of Vidyadhar Dynasty
[[श्रेणी:शब्दकोष]] यषोबाहु – आदिनाथ भगवान के 84 गणधरो में एक गणधर का नाम, आचार्य यषोभद्र के षिश्य, इनका अपरनाम आचार्य भद्रबाहु द्वितीय था। यं 8 अंगधारी थे तथा लोहाचार्य – 2 के गुरू थे। समय – वी नि 515 – 565 Yasobahu-Name of a chief disciple of lord Adinath, Also the name of the disciple…
देवद्रव्य (देवधन) Offering auspicious substances for worshipping Lord. पूजा, चैत्यालय आदि के निमित्त अर्पण किया हुआ द्रव्य । [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] युक्ति – पदार्थो को सिद्ध करने के लिए प्रयुक्त हेतू अथवा साधन। Yukti-Device, Stratagem
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == त्याग : == ण हि णिरवेक्खो चागो, ण हवदि भिक्खुस्स आसयविसुदी। अविसुद्धस्स हि चित्ते, कहं णु कम्मक्खओ होदि।। —प्रवचनसार : ३-२० जब तक निरपेक्ष त्याग नहीं होता है, तब तक साधक की चित्तशुद्धि नहीं होती है और जब तक चित्तशुद्धि (उपयोग की निर्मलता) नहीं होती है, तब तक…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बादरकृष्टि – 9 वें गुणस्थान में संज्वलन क्रोध, मान, माया, लोभ का अनुभाग घटाकर स्थूल खण्ड करना। Badarakristi- Gradual destruction of gross passion
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नचतुश्टय – बलभद्र के चार रत्न, रत्नमाला, गदा हल और मूसल Ratnacatustaya-Four jewels of Balbhadra