जम्बूद्वीपसमास!
जम्बूद्वीपसमास Name of a book written by Acharya Umaswami. आचार्य उमास वामी (ई.श. १-२) कृत संस्कृत गद्य में रचित ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
जम्बूद्वीपसमास Name of a book written by Acharya Umaswami. आचार्य उमास वामी (ई.श. १-२) कृत संस्कृत गद्य में रचित ग्रन्थ ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वावधि – Sarvaavadhi. Complete clairvoyance. अवधिज्ञान के तीन भेदों में एक भेद, पूर्ण अवधिज्ञान ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वसावद्य निवृत्ति – Sarvasaavadya Nivritti. Abstinence or freeness from all kinds of sinful worldly activities. समायिक; समस्त आरंभ परिग्रह से निवृत होना ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लाट – गुजरात के प्राचीन काल मे तीन भाग थे। उसमें से गुजरात का मध्य व दक्षिण भाग लाट कहलाता था। Lata-South and middle part of Gujrat state (of ancient time)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वविपरिणामना – loZfoifj.kkeuk& Sarvaviparinaamanaa. Karmic nature which is destroyed by the destruction of all Karmas. मूल प्रकृति विपरिणामना के दो भेदों में एक भेद ; जो प्रकृति सर्वनिर्जरा के द्वारा निर्जरा को प्राप्त होती है। वह सर्वविपरिणामना कही जाती है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] निदान-भोगों की तृष्णा से पीडित होकर रातदिन आगामी भोगों को प्राप्त करने की ही चिन्ता करते रहना निदानज नामक आर्त्तध्यान है”
छ The seventh consonant of the Devanagari syllabary. देवनागरी वर्णमाला का सप्तम व्यंजन , इसका उच्चारण स्थान तालु है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वधन – Sarvadhana. All wealth or property of one, Grand total of all results. किसी की संपूर्ण सम्पत्ति, गणित विषयक रूप से सम्पूर्ण समयों में पाये जाने वाले समस्त परिणामों के समूह को सर्वधन कहते है, इसी का दूसरा नाम पदधन भी है। यह ’मुहभूमीजोगदले । पदगुणिदे पदघणं होदि’ – इस करणसूत्र के अनुसार…