द्वितीयोपशम सम्यत्तव!
द्वितीयोपशम सम्यत्तव Second subsidential right belief. उपशम श्रेणी चढ़ने वाले साधु को क्षयोपशम सम्यग्दर्शन से पुनः जो उपशम सम्यक्त्व होता है उसे द्वितीयोपशम सम्यग्दर्शन कहते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
द्वितीयोपशम सम्यत्तव Second subsidential right belief. उपशम श्रेणी चढ़ने वाले साधु को क्षयोपशम सम्यग्दर्शन से पुनः जो उपशम सम्यक्त्व होता है उसे द्वितीयोपशम सम्यग्दर्शन कहते है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सापेक्ष धर्म – Saapeksa Dharma. Relative properties in matters. अनेकांत,सप्तभंगी अर्थात् वस्तु में प्ये जाने वाले विरोधी धर्म जो एक दूसरे पर निर्भर रहते है।
ऋजुगति Straight motion. वर्तमान शरीर को डोड़कर आगामी भव में जाते हुए जीव की जो सरल मोड़ा रहित एक सरल वाली गति।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
द्विचरमकाल The time less than one Samay than the ultimate time. अंतिम समय से एक समय पूर्व का काल द्विचरमकाल कहलाता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साधुधर्म – Saadhudharma. Basic restraints, conduct & discipline of Jain saints. अनगार धर्म । संसार शरीर भोगों से विरक्ति, ज्ञानाचार आदि 5 आचार, 10 धर्म, संयम, मूलगुण और तपरूप उत्तरगुण, मिथ्यात्व मोह आदि का नाष, कषायों का शमन , इन्द्रिय दमन, निर्मल रत्नत्रय तथा अंत में समाधि मरण यह सब मोक्षपद में कारण मुनियों…
द्वयर्धगुणहानि A type of decreasing series. गुणहानि आयाम को ड्योढ़ा (द्वयर्ध) करने पर जो प्रमाण प्राप्त हो। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] साधिक जघन्य – Saadhika Jaghanya. Some more than lowerst. जघन्य से कुछ अधिक ।
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परमार्थ तत्व:Another name of ‘Shuddopayog (supreme ele-ment).शुद्वोपयोग का अपरनाम ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सादिबंधी प्रकृति – Saadibamdhee Prakrteei. A type of karmic nature with having property of rebinding. सम्यग्दर्शन को प्राप्त करने के उपरांत जो जीव गिरकर पुनः मिथ्यादृष्टि हो जाता है उसे सादि-मिथ्यादृष्टि कहते है।
फ The 22nd consonant of the Devanagari syllabary. देवनागरी वर्णमाला का बाईसवाँ व्यंजन, इसका उच्चारण स्थान ओष्ठ है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]