बहुविध!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुविध- मतिज्ञान का एक भेद; बहुत प्रकार के अलग-अलग पदार्थो का ज्ञान होना। Bahuvidha- A type of sensory knowledge pertaining to many objects
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बहुविध- मतिज्ञान का एक भेद; बहुत प्रकार के अलग-अलग पदार्थो का ज्ञान होना। Bahuvidha- A type of sensory knowledge pertaining to many objects
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रत्नचतुश्टय – बलभद्र के चार रत्न, रत्नमाला, गदा हल और मूसल Ratnacatustaya-Four jewels of Balbhadra
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संख्या – Sankhyaa. Numbers or meaningful numbers, One of the eight Anuyogdvars (disquisition doors). गिनती, सत् प्ररूपणा में जो पदार्थों का अस्तित्व कहा गया है, उनके प्रमाण का वर्णन करने वाली संख्या हैं ” जीवादि पदार्थों के भेदों की गणना, यह 8 अनुयोग द्वारों में दूसरा अनुयोग द्वार है “
आनुपूर्वी नामकर्म प्रकृति A type of Karmic nature causing same shape of the soul-points of beings as the shape of their previous birth. जिसके उदय से विग्रहगति में आत्म प्रदेशों का आकार पिछले (छोडे़ हुए) शरीर के आकार का हो।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] बाहुयुध्द – Bahuyuddha. Combat, a non – violenceful fighting with the strength of arms between two person. दो वक्तियों के बीच भुजाओं से होने वाला युद्ध ” यह अहिंसक युद्ध युग की आदि मे सबसे पहले भगवान ऋषभदेव के पुत्र भरत – बाहुबली के बीच में हुआ था “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधोत्सरण- उत्कर्षण; स्थिति बंध को बढाकर एक एक अन्ततर्मुहुर्त तक समान बंध करना। Bandhotsarana- Bond progression
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लधुषंका – मूत्रोत्सर्ग, लघु व दीर्घ षंका जाने के बाद प्रायष्चित के रूप 25 उच्छ्वास का कायोत्सर्ग किया जाता है। Laghusamka-Urination
दण्डरत्न One of the 14 jewels of Chakravarti. 14 रत्नों में एक रत्न चक्रवर्ती का एक निर्जीव रत्न । यह सेना के आगे चलता है। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रेस्य प्रयोग- देषव्रत का एक अतिचार; मर्यादा के बाहर सेवक को भेजकर काम कराना। Presya prayoga- A type of violation, to do something out of limit