षट् कर्म!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट् कर्म – Sat Karma. Six occupations for livelihood instructed by Lord Rishabhadev. भगवान ऋषभदेव द्वारा प्रजा की आजीविका के लिए बताये गये 6 कार्य; असि,मसि, कृषि, विद्या, वाणिज्य और शिल्प “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट् कर्म – Sat Karma. Six occupations for livelihood instructed by Lord Rishabhadev. भगवान ऋषभदेव द्वारा प्रजा की आजीविका के लिए बताये गये 6 कार्य; असि,मसि, कृषि, विद्या, वाणिज्य और शिल्प “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रविवीर्य – चक्रवर्ती भरतेष का पुत्र, इसने जयकुमार के साथ तीर्थकर र्वशभदेव से दीक्षा ली थी। Ravivirya-the son of Chakravarti (emperor) of Bhartesh
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्वेतवर्ण – Shvetavarna. White colour, as a sign of meritoriousness. एक लौकिक मंगल, यह अरहंत भगवान के शुक्लध्यान, शुक्ल लेश्या का प्रतीक होने से मंगल कहलाता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधक-कर्मो का बंध करने वाला, ऋण के बदले रखी जाने वाली वस्तु। Bandhaka- one related to the binding of karmas, a surety or guarantee
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगदु प्रणिधान – सामायिक षिक्षाव्रत का एक अतिचार, मन वचन काय की दुश्ट प्रवृत्ति। Yogaduhpranidhana-bad tendencies or attitude of one (an infraction of samayik)
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रेयांस – Shreyaansa. Name of a king, a great personality of Jaina history who gave sugarcane juice to Lord Rishabhdev, initiating the food-offering to the Jaina saints. हस्तिनापुर के कुरुवंशीय राजा सोमप्रभ के भाई ” वृषभदेव को देखकर पूर्व भव में अपने द्वारा दिए गये आहार दान का स्मरण हो आया था ” इससे…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] बंधअपसरण-अपकर्शण; बंध का क्रम से घटना बंधापसरण है। BandhaApasarna- Bond reduction
[[श्रेणी : शब्दकोष]] मनुष्यायु कर्म प्रकृति- Manushyaayu Karma Prakrti. Karmic nature causing human body. जिस कर्म के उदय से जीव मनुष्य देह में रहे “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्रुतवाद – Shrutavaada. Scriptural speech. अंग प्रविष्ट और अंगबाह्या श्रुत का कथन जिस वचन कलाप के द्वारा किया जाता है वह द्रव्यश्रुत श्रुतवाद कहलाता है, श्रुतज्ञान का एक पर्यायवाची नाम “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] रायचन्द्र – षताविधानि एक चिद्वान श्रावक गुजरात में पंचाण भाई मेहता के पुत्र। आपको जति स्मरण था। महात्मा गांधी जी धर्मक्ष्रेत्र में अपना मार्गदर्षक मानते हैं। अपरनाम श्रीरामचंन्द्र। Rayacamdra-The other name of ‘Shrimad rajchandra’, who was the son of ‘Panchanbhai Mehta’ & spiritual guide of ‘Mahatma Gandhi’