वैनयिकॠध्दि!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैनयिकॠध्दि –VainayikiRddhi A type of supernatural power obtained through superme reverence for scriptures. प्रज्ञाश्रमण ॠध्दि के ४ भेदों में एक भेद, द्वदशांग श्रुत की योग्य विनय करने से उत्पन्न होने वाली ॠध्दि “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैनयिकॠध्दि –VainayikiRddhi A type of supernatural power obtained through superme reverence for scriptures. प्रज्ञाश्रमण ॠध्दि के ४ भेदों में एक भेद, द्वदशांग श्रुत की योग्य विनय करने से उत्पन्न होने वाली ॠध्दि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लेश्या – Leshya.: Karmic stain , Aura , colouration. कषाय से अनुरंजित जीव की मन वचन काय की या जो आत्मा को शुभाशुभ कर्मों से लिप्त करे ” कृष्ण , नील , कपोत , पीत ,पद्य , शुक्ल इसके ये 6 भेद है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पण्हसवण:Another name Dharsenacharya. धरसेनाचार्य का ही दूसरा नाम , क्योकि प्रज्ञाश्रमण का प्राकुत रूप पण्हसवण है।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विरशासन जयंती व्रत –VirasasanaJayanintiVrata. A vow (fasting) on Shravan Krishna. 1, the first auspicious day on which the resonant preaching (DivyaDhvani) of Lord Mahavira was delivered. भगवन महावीर की दिव्यध्वनी की प्रथम तिथि श्रावण कृ.१ उपवास करना ” ‘ॐ’ ह्रीं श्री महावीरराय नम:’ इस मंत्र का जाप्य करना “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाप आस्त्रव – Papa Asrava. Influx of sinful Karmas. पाप कर्मो के आने के कारणभाव- कलुषता, विषयों के प्रति लोलुपता, पर को परिताप करना आदि”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पक्षाभास: Fallacious arguments. मित्याप्रक्ष -इष्ट, असक्ष् िऔर अबाधित इन विषेषणो से विपरीत अनिष्ट, सि़द्व व बाधित पक्षाभास है।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मुमुक्षु–Mumukshu. Those desirous of salvation or liberation. मोक्ष की इच्छा करने वाले भव्य जीव” समयसार में निर्ग्रन्थ दिगंबर मुनिओ को मुमुक्षु कहा है”
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूगोल – Bhugola. Geography. जैनाभीमत में मध्यलोक- जंबुद्वीप आदि ब्रह्रांड का वर्णन विषय भूगोल में है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पात्रदेाष :A fault to have jealousy with worthy donees.पात्र के प्रति ईष्र्या आदि का होना।