तंत्रवार्तिक!
तंत्रवार्तिक Name of a commentary book written by Kumaril Bhatta. मीमांशा दर्शन की कुमारिल भट्ट (ई.700)रचित एक गंथ। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
तंत्रवार्तिक Name of a commentary book written by Kumaril Bhatta. मीमांशा दर्शन की कुमारिल भट्ट (ई.700)रचित एक गंथ। [[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विषापहार स्तोत्र –VisapaharaStotra. A praising hymn written by Dhananjay (poet). धनज्ज्य कवि द्वारा रचित संस्क्रत भाषाबध्द एक स्तोत्र, रचना करते समय जिसके पाठ से उनके पुत्र का सर्प विष उतर गया था “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भूतबली – Bhutabali. Name of a great Acharya, the disciple of Acharya Arhadvali. एक आचार्य (ई. ६६-१५६)जिनके दीक्षा गुरु आचार्य अर्ह्द्वली और शिक्षा गुरु ध्ररसेन थे ” इन्होनें षट्खंडागम के सूत्रों की रचना की है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वोपशमन – Sarvopashamana. Subsidence of all 28 Karmic Nature of delusion. मोहनीय कर्म की 28 प्रकृतियों का उदयाभाव करना । यह धर्मध्यान का फल है।
जम्बूवृक्षस्थल Region of Jambuvriksha (a super tree). जम्बूवृक्ष सामान्य स्थल ; ५०० योज.अन विस्तार युक्त है , मध्य में ८ योजन एवं किनारों पर २ कोस मोटा है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वानंत – Sarvaananta. All infinite. अनंत का एक भेद । आकष को धन रूप से देखने पर उसका अंत नहीं पाया जाता इसलिये उसे सर्वानंत कहते है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वसंघ – Sarvasangha. Name of the 58th chief disciple of Lord Rishabhdev. भगवान ऋषभदेव के 58 वें गणधर ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वमत – Sarvamata. Something universally accepted. जो सर्वरूप मान्य हो ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लिपिबद्ध – लिखा हुआ द्रव्यश्रुत जो 64 अक्षरो एवं पदो के द्वारा लिखा जाता है। Lipibaddha-Something put in writing form
चैत्य भूमि The land for temple (related to eternal Jain idols). भवनवासी आदि सभी देवों के जिनमंदिरों में चैत्यभूमि होती है जो अकृत्रिम जिनप्रतिमा से युक्त होती है ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]