विध्दण (कवि)!
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विध्दण (कवि) – Viddhanu (Kavi). Name of a poet. ज्ञानपंचमी अर्थात् श्रुत पंचमीव्रत माहात्म्य नामक भाषा छंद रचना के कर्ता एक कवि ” समय –वि. सं. १४२३ “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विध्दण (कवि) – Viddhanu (Kavi). Name of a poet. ज्ञानपंचमी अर्थात् श्रुत पंचमीव्रत माहात्म्य नामक भाषा छंद रचना के कर्ता एक कवि ” समय –वि. सं. १४२३ “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष]] == निर्लेप : == चरदि जदं जदि णिच्चं, कमलं व जले णिरुवलेवो। —प्रवचनसार : ३-१८ यदि साधक प्रत्येक कार्य यतना से करता है, तो वह जल में कमल की भाँति निर्लेप रहता है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सूक्ष्म क्रियाप्रतिपाती – Sukshma Kriyapratipaatee. The third absolute meditational stat achieved at the end of the 13th stage of spiritual development. तीसरा शुक्लध्यान – यह ध्यान तेरहवें गुणस्थान के अंत में होता है। जिन्होंने द्वितीय शुक्लध्यान के द्वारा 4 घातिया कर्मो का क्षय करके केवलज्ञान प्राप्त कर लिया है तब सब प्रकार के मन…
[[श्रेणी :शब्दकोष]] मूलक– Mulak. Name of a country of Bharat Kshetra Arya Khand (region). भरतक्षेत्र आर्य खंड का एक देश”
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार]] [[श्रेणी:शब्दकोष ]] == द्रव्य : == आकाशकालजीवा:, धर्माधर्मौ च र्मूितपरिहीना:। मूर्तं पुद्गलद्रव्यं, जीव: खलु चेतनस्तेषु।। —समणसुत्त : ६२६ आकाश, काल, जीव, धर्म और अधर्म द्रव्य अर्मूितक हैं। पुद्गल द्रव्य र्मूितक है। इन सबमें केवल जीव द्रव्य ही चेतन है। दव्वं सल्लक्खणयं उप्पादव्वयधुवत्तसंजुत्तं। —पंचास्तिकाय : १० द्रव्य का लक्षण सत् है और वह सदा…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सुषेणा – Sushenaa. Mother’s name of Lord Sambhavnath. श्रावस्ती नगरी के राजा दृढराज की रानी एवं तीर्थकर संभवनाथ की माता ।
[[श्रेणी :शब्दकोष]] यमकूट–Yamkut. Name of a summit at Yamkgiri. यमकगिरी पर स्थित एक कूट”
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वर्गशलाका – Vargashalaakaa.: A mathematical operation. दो की संख्या का वर्ग जितनी बार हो उस राशि का नाम ” जैसे -16 की वर्ग शलाका 2 है ,क्योंकि 2 का वर्ग 4 , 4 का वर्ग 16 “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पार्श्वशय्यासन तप – Parsvasayyasana Tapa. A type of austerity, to sleep in single posture. कायाक्लेश का एक भेद; किसी एक करवट से सोना “