छयालीस!
छयालीस Forty six (a number). ४६ ; अर्हन्त भगवान के छयालीस गुण इत्यादि ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
छयालीस Forty six (a number). ४६ ; अर्हन्त भगवान के छयालीस गुण इत्यादि ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वसंक्रमण – Sarvasankramana. All Karmic transition. अंत की फाली में शेष बचे सर्व प्रदेषो का अन्य प्रकृति रूप होना सर्वसंक्रमण है।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लब्धि – प्राप्ति सम्यक्त प्राप्ति की पूर्व सामग्री, क्षयोपषन विषुद्धि प्रायोग्य देषना करण 5 लब्धिया जीव मे संयम या संयमासंयम आदि को धारण करने की योग्यताएं। अंतराय के क्षयोपषन से प्राप्त षक्ति दान लाभ भोग उपभोग वीर्य क्षायिक आदि 9 लब्धियां। Labdhi-Attainment, Different types of gain for getting salvation
छेद An infraction of vow of non-violence (piercing the organs of animals), Karmic destruction, Hole, Opening . अहिन्साणुव्रत का एक अतिचार ; पशुओं के कान , नाक आदि अवयवों का भेदना , कर्मों का क्षय , सुराख ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वभद्र – Sarvabhadra. A noble one. A type of peripatetic deities. सुशील यक्ष जाति के व्यंतरों के 12 भेदों में एक भेद ।
[[श्रेणी:शब्दकोष]] योगीन्द्रसागर – आचार्य समन्तिसागर महाराज अंकलीकर के एक प्रसिद्ध षिश्य बालाचार्य। समय ई ष 20 – 21 Yogindrasagara-Name of a saint, The disciple of Acharya shri Sanmatisagar maharaj
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्वघाती – Sarvaghaatee. Karmic nature causing destruction of soul’s attributes जिस कर्म के उदय से अनुजीवी गुूणों का पूर्णरूप से घात होता है।
चैतन्य Conscious soul, Rationality, perception. चित्त रूप आत्मा , जीव , ज्ञान , संवेदन ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] सर्जकषाय – Sarja Kashaaya. Bitter or pungent passions. सर्ज साल नाम के वृक्ष को कहते है। उसके कषैले रस के समान जीव की कषायरूप् परिणति को सर्जकषाय कहते है।