संक्लेश!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संक्लेश – Sanklesha. Passionate or painful thoughts. असाता वेदनीय कर्म के बंध योग्य परिणाम या तीव्र कषाय रूप परिणाम का नाम संक्लेश है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] संक्लेश – Sanklesha. Passionate or painful thoughts. असाता वेदनीय कर्म के बंध योग्य परिणाम या तीव्र कषाय रूप परिणाम का नाम संक्लेश है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रोषध प्रतिमा- श्रावक की 11 प्रतिमा में चौथी प्रतिमा; अश्टमी, चतुर्दषी के दिन शä किे अनुसार प्रोशधेपवास करना। उत्कृश्ट प्रोशध प्रतिमा में सप्तमी और नवमी को एक बार भेजन और अश्टमी को उपवास होता है। मध्यम में तीनों दिन एकाषन किया जाता है तथा जघन्य में अश्टमी को एक बार भोजन होता हैं। Prosadha…
उपचितावयन पद Specified terms of organ diseases etc. रोगादि के निमित्त मिलने पर किसी अवयव के बढ़ जाने से जो नाम बोले जाते हैं जैसे गलगंड लम्बकर्ण आदि।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
दक्षिणार्ध Name of a summit & a deity of Vijayardh mountain. विजयार्ध पर्वत के एक कूट व देव का नाम। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रेक्षागृह मण्डप- सभागृह। Preksgraha Mandpa- Assembly hall
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षष्ठ अनुव्रत – Sastha Anuvrata. A vow-renouncement of food taking after sun-set. रात्रि भोजन त्याग छठा अनुव्रत है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] प्रिय- जो वस्तु अपने को पसंद हो, रमणीय, अनुकूल, उत्तरधातकी-खण्डद्वीप का रक्षक देव। Priya – favorite thing, dear one
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट्प्राभृत टीका – Satpraabhrita Teekaa. The Sanskrit commentary book on ‘Shatprabhrit’ treatise. कुन्दकुन्द आचार्य के षट्प्राभृत की आचार्य श्रुतसागर (ई. सन् 1487-1533) कृत संस्कृत टीका “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] षट् आवश्यक – Sat Aavashyaka. Six essential duties of Jaina saints. मुनियों के 6 आवश्यक कर्त्तव्य; सामायिक, वंदना, स्तुति,प्रतिक्रमण, स्वाध्याय और कार्योत्सर्ग “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] श्वेतपंचमी व्रत – Shvetapanchami Vrata. A particular & procedural vow (fasting). ऐसा व्रत जिसमे आषाढ, कार्तिक व फाल्गुन तीनों में से किसी भी मास में प्रारम्भ करके 65 महीनों तक प्रत्येक मास शुक्ल 5 का उपवास किया जाता है व त्रिकाल नमस्कार मंत्र का जाप किया जाता है “