गुणभद्र!
गुणभद्र Name of Acharyas, disciple of Acharya Jinsen (II) etc. आचार्य जिनसेन द्वितीय के शिष्य ई. ८७०-९१० उत्तरपुरंज आदि के करता इस नाम के और भी कुछ आचार्य हुए ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
गुणभद्र Name of Acharyas, disciple of Acharya Jinsen (II) etc. आचार्य जिनसेन द्वितीय के शिष्य ई. ८७०-९१० उत्तरपुरंज आदि के करता इस नाम के और भी कुछ आचार्य हुए ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भोगोपभोग:Enjoyment of worldly pleasures. जो वस्तु एक बार भोगने में आये वह भोग (भोजन इत्यादि) एवं जो बार बार भोगने में आये वह उपभोग (शय्या इत्यादि) कहलाती है “
दुरवर्ती Something situated at a long distance like Sumeru mountain etc. अपने से दूर स्थित पदार्थ जैसे- सुमेरू पर्वत आदि। [[श्रेणी: शब्दकोष ]]
गौरीविद्या A super knowledge, initiator of Gaurik Vidyadhar dynasty. एक विद्या; जिससे गौरिक विद्याधर वंश की उत्पत्ति हुई ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी: शब्दकोष]] भोगंकरा:A female deity of Gajdant summit. गजदन्त कूट की एक देवी का नाम “
गद्यचिंतामणि A book written by Acharya Vadeebh singh. आचार्य वादीभसिंह ओइय देव (ई. ७७०-८६०) द्वारा रचित एक ग्रंथ।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
दुःशासन The son of Dhritrashtra. धृतराष्ट्र का पुत्र, जिसने सती द्रौपदी का अपमान किया था।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] शुद्ध निश्चयनय – Shuddha Nishchayanaya. A viewpoint believing the pure soul . शुद्ध आत्मा द्रव्य को ग्रहण करने वाला नय “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वीतराग सम्यग्दृष्टि –VitaragaSamyagdrsti. One having right spiritual knowledge. निश्चय सम्यग्दृष्टि, जो वीतराग सम्यग्दर्शन से सहित होते है “