पारमार्थिक ध्यान!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारमार्थिक ध्यान – Parsmarthika Dhyana. Meditation for the knowledge of own soul. स्वआत्मा को पहचानने के लिए किया जाने वाला ध्यान “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पारमार्थिक ध्यान – Parsmarthika Dhyana. Meditation for the knowledge of own soul. स्वआत्मा को पहचानने के लिए किया जाने वाला ध्यान “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] लेबड़ – Lebad.: Sticky edibles liquids or any matter. आहार का एक भेद , जो हाथ में चिपकता है ऐसा पतला पदार्थ दही , लस्सी आदि “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पापानुबंधी पुण्य – Papanubamdhi Punya. Converting good results into bad by following wicked activities. पुण्य के उदय से प्राप्त बुद्धि, कौशल, निरोग शरीर आदि क्षमताओं को पापार्जन में लगा देना “
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[श्रेणी:शब्दकोष]] == चरित्त : == चारित्तं समभावो —पंचास्तिकाय : १०७ समभाव ही चारित्र है। असुहादो विणिवित्ती, सुहे पवित्ती य जाण चारित्तं। —द्रवसंग्रह : ४५ अशुभ से निवृत्ति और शुभ में प्रवृत्ति करना—इसे ही चारित्र समझना चाहिए। थोवम्मि सिक्खिदे जिणइ, बहुसुदं जो चरित्तसंपुण्णो। जो पुण चरित्तहीणो, िंक तस्स सुदेण बहुएण।। —मूलाचार : १०-६…
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पानभोजन- Panabhojana. To take pure meals in daylight. आहिंसाणु व्रत की एक भावना; सूर्यप्रकाश में देख शोधकर भोजन पान करना”
दासी दास Men and women servants. 10 प्रकार के ब्राह्य परिग्रह में एक-स्त्री और पुरूष नौकर ।[[श्रेणी: शब्दकोष ]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावार्थ दीपिका – Bhavartha Dipika. A commentary book written by Pandit Shivjit. पं. शिवजित (वि. १८१८) कृत भगवती आराधना की भाषा टीका “
उदीचीन Northern. उत्तर दिशा की ओर मुड़ा हुआ उत्तर दिशा से सम्बन्ध रखने वाला।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
आदि Beginning, Primeval, Etcetera (etc.). ‘प्रथम‘ के अर्थ में प्रयुक्त होता है जैसे ऋषभादि भगवान, ‘प्रकार‘ के अर्थ में जैसे पूना आदि शहर, ‘ समीप्य‘ के अर्थ में जैसे नदी आदिक क्षेत्र।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पाटलिका:Name of an auspicious articles kept near the idol of lord.जिन प्रतिमा के पास विद्यमान रहने वाले 108 उपकरणों मे से एक।