एकान्त मिथ्यात्व!
एकान्त मिथ्यात्व One sided illusion, See – Ekå´ta. अनेक धर्म या स्वभाव वाले पदार्थ में एक ही धर्म को मानना। देखें एकांत।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
एकान्त मिथ्यात्व One sided illusion, See – Ekå´ta. अनेक धर्म या स्वभाव वाले पदार्थ में एक ही धर्म को मानना। देखें एकांत।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भव्य अलड्करण – Bhavya Alankarana. Great ornamentation. भव्यता के साथ सुशोभित करना “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भुतविषय नय – Bhutavishya.Naya. See- Bhutavishya.Naya. देखें – भूतग्राही नय “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वार्तिक – Vaartika.: Exposition or commentary of any matter. सूत्रों के अर्थ को विशेष रूप से समझाने हेतु जो टीका की जाती है उसे वार्तिक कहते हैं “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] परंपरा लब्धि :Synonym of Shruggyan (scriptural knowledge.) श्रुतज्ञान का एक पर्यायवाची नाम ।
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपुलमति – Vipulamati. A type of telepathic knowledge (Manah Paryay Gyan). मन: पर्यय ज्ञान के दो भेदों में दूसरा भेद; जो ज्ञान दूसरे के मन में स्थित सरल और कुटिल सब बातों को जान लेता है ” अर्थात् चिन्तित, और अर्ध – चिन्तित को भी जान लेता है “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भावमल – Bhavamala. Inauspicious results of one. अज्ञान, अदर्शन इत्यादिक जीव के परिणाम “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] भिन्न दश पूर्वी – Bhinna Dash Purvi. One who gets involved in acquiring great knowl-edge. दशमपूर्व विधानुवाद के समाप्त होने पर ७०० क्षुद्र एवं ५०० महाविधाओं के लाभ को जो प्राप्त होता है “
[[श्रेणी: शब्दकोष]] पन्नालाल:A Pandit who wrote number of books. एक पंडित (ई0 1770-1840), उत्तरपुराण व राजवार्तिक की भाषा वचनिकाओं तथा विद्वद्जन बोधक आदि के कर्ता ।
[[ श्रेणी:जैन_सूक्ति_भण्डार ]] [[ श्रेणी:शब्दकोष ]] == निर्जरा : == बंधपदेशग्गलणं निज्जरणं इदि जिणेहिं पण्णत्तं। जेण हवे संवरणं तेण दुणिज्जरणमिदि जाणे।। —वारस अणुवेसवा : ६६ बंधे हुए कर्म—प्रदेशों के क्षरण को निर्जरा कहा जाता है। जिन कारणों से संवर होता है, उन्हीं कारणों से निर्जरा होती है। यथा महातडागस्य, सन्निरुद्धे जलागमे। उत्सिंचनया तपनया, क्रमेण शोषणा…