पुद्गल परमाणु!
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गल परमाणु – Pudgala Paramanu. Indivisible particle of the matter (Pudgal). एक प्रदेशी पुद्गल जिसका दूसरा हिस्सा नहीं हो सकता तथापि यह उत्पाद व्यय गुण सहित होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पुद्गल परमाणु – Pudgala Paramanu. Indivisible particle of the matter (Pudgal). एक प्रदेशी पुद्गल जिसका दूसरा हिस्सा नहीं हो सकता तथापि यह उत्पाद व्यय गुण सहित होता है “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वामन संस्थान – Vaamana Sansthaana.: A Karmic nature causing pigmy or short heightened body. नामकर्म की एक प्रकृति; जिस कर्म के उदय से जीव का बौना शरीर होता है “
उपदेशसम्यक्त्वार्य A type of Aryas (noble persons) who get right faith by the preaching of saints. अनृद्धि प्राप्त आर्य जिन्हें तिरेसठ शलाका पुरूषों के पुराण (वृत्तान्त) के उपदेश से तत्वार्थ श्रद्धान उत्पन्न हुआ हो।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैदूर्यमणि –Vaiduryamani The sapphire-a coloured gem, Body colour of Lord Munisuvratnath&Neminath was like sapphire. नीलम, नील वर्ण वाली मणि – तीर्थकर मुनिसुव्रतनाथ एवं तीर्थकर नेमिनाथ का वर्ण वैदूर्यमणि सट्दश था ” सुमेरु पर्वत की चूलिका वैदूर्यमणियी हैं “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] पंडितपंडितमरण – Panditapanditamarana. Auspicious & holy liberation of omniscient or salvation of Lord Arihant. क्षीणकसाय केवली भगवान के निर्वाण को पंडितपंडित मरण कहते हैं “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] वैदर्भ –Vaidarbha A country of Bharat KshetraAryaKhand (region), Name of the prime chief disciple of Lord Chandraprabh&Lord Pushpadantnath. भरतक्षेत्र आर्यखंड का एक देश, तीर्थकर पुष्पद्न्तनाथ के प्रथम गणधर का नाम (अपरनाम – विदर्भ) “
[[श्रेणी:शब्दकोष]] वाद – Vaad. Debate, Competitive discussion. हार-जीत के अभिप्राय से की गई किसी विषय सम्बन्धी चर्चा “
एकादिूत्रिलघुक्रिया A method of poetics. छंद शास्त्र के 6 प्रत्ययों में एक प्रकरण।[[श्रेणी:शब्दकोष]]
[[श्रेणी : शब्दकोष]] विपरीताभिनिवेश – Viparitabhinivesha. Wrong faith due to wrong conception. मिथ्यात्व के उदय से उत्पन्न विपरीत ज्ञान या श्रध्दान “
[[श्रेणी : शब्दकोष]] व्रद्धि ह्रास – Vrddhi – Hraasa Universal changes pertaining to the growth & destruction. भरत और ऐरावत क्षोत्तों में षटगुण हानि वृद्धि– हास रूप परिवर्तन जिसे उत्सर्पिणी और अवसर्पिणी काल के नाम से जाना जाता है “